वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई में रखे तवे का भी महत्व होता है. यहां तक कि रोटी बनाने वाले तवे का भी किसी एक ग्रह से संबंध होता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार रोटी बनाने वाले तवे का संबंध मंगल ग्रह से है. मंगल ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में ऊर्जा, रक्त, अग्नि और रसोई का स्वामी माना जाता है. ऐसी स्थिति में तवे की स्थिति, सामग्री और रखरखाव से घर में कई तरह के अशुभ परिणाम भी देखने को मिलते हैं, तो इसके लिए वास्तु के कुछ नियमों का पालन आवश्यक करना चाहिए.
वास्तु शास्त्र के अनुसार लोहे का तवा बेहद शुभ माना जाता है. कभी भी चूल्हे अथवा गैस पर खाली तवा नहीं चढ़ाना चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से मंगल ग्रह क्रोधित होते हैं जिससे घर में कलह उत्पन्न होती है. हमेशा तवे पर घी अथवा तेल लगाकर ही चूल्हे या फिर गैस पर चढ़ाना चाहिए. धर्म के जानकार बताते हैं कि तवे पर बनी पहली रोटी गाय अथवा आखिरी रोटी किसी कुत्ते को देना चाहिए. ऐसा करने से मंगल दोष शांत होता है.
इसके अलावा तवे को इस्तेमाल करने के बाद कभी भी उल्टा नहीं रखना चाहिए. ऐसा करने से घर में नकारात्मकता बढ़ती है और धन की हानि होती है. ऐसी स्थिति में रात में तवे को धोकर साफ कर ही रखें. ऐसा करने से मंगल की चल रही विपरीत दिशा से मुक्ति मिलती है. वास्तु शास्त्र के अनुसार इटावा हमेशा रसोई के दक्षिण पूर्व में ही रखना चाहिए. उत्तर पूर्व या फिर ईशान कोण में रखने से मंगल और गुरु में टकराव उत्पन्न होता है. ऐसी स्थिति में इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है.

