Uttar Pradesh

मौसम के इस ठंडे समय में किसान मशरूम की खेती करें, इससे उनकी पैदावार बंपर होगी और वे मालामाल हो जाएंगे।

सहारनपुर: ठंड का मौसम शुरू हो चुका है और इसी मौसम में किसान कुछ ऐसी फसलें लगाना पसंद करते हैं, जो कम लागत में अच्छा मुनाफा दें। इन्हीं में से एक है मशरूम की खेती. मशरूम की कई वैरायटी होती हैं, लेकिन ठंडे मौसम में कुछ किस्में किसानों को खासा फायदा देती हैं। उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जनपद मशरूम उत्पादन में प्रदेश में नंबर-वन माना जाता है। यहां के युवा अब परंपरागत खेती से हटकर मशरूम की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि इसमें खेत की नहीं बल्कि खाली पड़े कमरों की जरूरत होती है। यहां तक कि इसे झोपड़ी लगाकर भी किया जा सकता है। कम पूंजी में शुरू होने वाली यह खेती युवाओं को अच्छा मुनाफा दे रही है।

सर्दियों के मौसम में मशरूम की खेती के लिए सबसे अच्छी वैरायटी है बटन मशरूम। यह मशरूम एक बार लगाने के बाद लगभग 5 से 6 महीने तक उत्पादन देती है। दूसरी वैरायटी है ओएस्टर मशरूम (जिसे ढींगरी मशरूम भी कहा जाता है), जो लगभग 1 से डेढ़ महीने तक चलती है। किसान इन दोनों वैरायटी को लगाकर अच्छी इनकम जनरेट कर सकते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी व प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा का कहना है कि नवंबर महीने से मशरूम उत्पादन का सबसे अच्छा समय शुरू होता है। अगर किसान मौसम के अनुसार मशरूम की वैरायटी चुनते हैं तो उन्हें बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिलता है।

डॉ. कुशवाहा के अनुसार, इस समय किसान भाई सफेद बटन मशरूम पर ध्यान दें। वे खुद कंपोस्ट तैयार करने की बजाय बने-बनाए कंपोस्ट बैग खरीदें, क्योंकि कंपोस्ट तैयार करने में 15 दिन से 1 महीने का समय लगता है। अब अगर किसान खुद कंपोस्ट बनाएंगे तो उत्पादन में देरी होगी और सीजन का फायदा नहीं मिल पाएगा।

ओएस्टर मशरूम भी अच्छी कमाई देती है, लेकिन इसमें थोड़ी सावधानी की जरूरत होती है। जब तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है और नमी अधिक हो जाती है, तो इसकी क्वालिटी पर असर पड़ता है। ऐसे में अगर मशरूम खराब होने लगे तो किसान इसे सुखाकर उसका पाउडर बनाकर बाजार में बेच सकते हैं।

मशरूम की खेती के लिए ज्यादा जमीन या निवेश की जरूरत नहीं होती। किसान अपने घर के खाली कमरे में मात्र ₹10,000 की लागत से मशरूम उत्पादन शुरू कर सकते हैं और कुछ ही महीनों में लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।

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