Uttar Pradesh

सिर्फ थकान और प्लेटलेट्स नहीं, डेंगू से मंडरा रहा पैरालिसिस का खतरा… जानें कैसे? – उत्तर प्रदेश समाचार

डेंगू अब सिर्फ थकान और प्लेटलेट्स कम करने तक सीमित नहीं रहा. वायरस अब तंत्रिका तंत्र और दिमाग की नसों तक पहुंच रहा है, जिससे गंभीर मामलों में पैरालिसिस का खतरा भी बढ़ गया है. डॉक्टर पोद्दार ने चेतावनी दी है कि समय रहते इलाज और सावधानी न बरती जाए तो मरीजों में तंत्रिका संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

डेंगू सिर्फ बुखार और प्लेटलेट्स की कमी तक सीमित नहीं है बल्कि यह शरीर के कई अहम अंगों को प्रभावित कर सकता है. पोद्दार हॉस्पिटल के डॉक्टर ए.के. पोद्दार के मुताबिक डेंगू के वायरस का असर लीवर, फेफड़ों और पाचन तंत्र तक पहुंच जाता है और गंभीर मामलों में दिमाग में खून जमने से बेहोशी या तंत्रिका तंत्र पर असर भी पड़ सकता है. हालांकि ज्यादातर मरीजों में पैरालिसिस नहीं होता लेकिन इलाज में देरी या प्लेटलेट्स का अत्यधिक गिरना जान के लिए खतरा बन सकता है. इसलिए डेंगू के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

डॉ. पोद्दार ने बताया कि डेंगू एक वायरल बुखार है जो अधिकतर बरसात के मौसम में विशेष रूप से सितंबर और अक्टूबर के महीनों में फैलता है. इस साल और पिछले साल डेंगू का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा लेकिन कुछ वर्ष पहले इस बीमारी ने बच्चों और बड़ों दोनों की सेहत पर गहरा असर डाला था. डेंगू में तेज बुखार के साथ प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटती है जबकि सामान्य रूप से यह 2 लाख से 4.5 लाख प्रति क्यूबिक मिलीमीटर होती है. तुरंत करें ये काम डेंगू में यह स्तर 1 लाख से नीचे पहुंच जाता है और अगर 50 हजार से कम हो जाए तो स्थिति गंभीर मानी जाती है. जब प्लेटलेट्स 20 हजार से नीचे गिरते हैं तो मरीज को तुरंत प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी हो जाता है वरना शरीर के विभिन्न हिस्सों से खून गिरना शुरू हो सकता है मुंह, नाक, आंख, पेशाब या उल्टी के माध्यम से यहां तक कि महिलाओं में माहवारी के दौरान रक्तस्राव बढ़ सकता है.

डॉ. पोद्दार ने बताया कि गंभीर मामलों में पेट और फेफड़ों में पानी भरना, लीवर, गॉल ब्लैडर और आंतों में सूजन जैसी जटिलताएं भी सामने आती हैं. मरीज को ठंड लगना, तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर में तीव्र दर्द की शिकायत होती है. उन्होंने कहा कि डेंगू में आमतौर पर पैरालिसिस नहीं होता लेकिन अगर दिमाग में खून जमने लगे तो मरीज बेहोश हो सकता है.

उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है, वहीं रिकवरी के बाद मरीज को करीब एक महीने तक कमजोरी महसूस होती है जो धीरे-धीरे ठीक हो जाती है. डॉ. पोद्दार ने सलाह दी कि डेंगू से बचने के लिए साफ-सफाई, मच्छरों से बचाव और शुरुआती लक्षणों पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श अत्यंत आवश्यक है.

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