Uttar Pradesh

पंडित छन्नूलाल मिश्र की कहानी: जब छन्नूलाल मिश्र को मिला पद्मविभूषण….तो वह अचानक घर छोड़ कहां चले गए थे? जानें दिलचस्प किस्सा

पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, संगीत जगत के लिए अपूर्णीय क्षति

वाराणसी: शास्त्रीय संगीत के जाने माने कलाकार पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र ने आज दुनिया को हमेशा हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. उन्होंने लंबे समय से बीमार चल रहे थे. पंडित छन्नूलाल मिश्र वैसे तो आजमगढ़ जिले के रहने वाले हैं, लेकिन उन्होंने संगीत की साधना बनारस में ही की थी. बनारस में उनके जीवन से जुड़े कई अहम किस्से हैं, जिनमें से एक उनके पद्मविभूषण सम्मान से जुड़ा हुआ है. भारत सरकार ने साल 2020 में उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से नवाजा था. इस घोषणा के बाद बनारस के पत्रकार और उनके जानने वाले उनके आवास छोटी गैबी में पहुंचने लगे. भीड़ को देख छन्नूलाल अपने पैतृक आवास से निकल गए और लोग उन्हें ढूंढते रह गए.

उनके जाने के बाद सीनियर जर्नलिस्ट पीयूष आचार्य ने बताया कि उस समय वो घर से जाने के बाद सीधे संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वम्भर नाथ मिश्र के घर पहुंच गए. उस समय वो थोड़े घबराए हुए भी थे. पीयूष आचार्य ने बताया कि पद्मविभूषण छन्नूलाल मिश्र और संकट मोचन के महंत विश्वम्भर नाथ मिश्र दोनों एक दूसरे का सम्मान किया करते थे और एक दूसरे के पांव भी छूते थे. उनका जाना अपूर्णीय क्षति है, जो संगीत जगत के लिए एक बड़ा झटका है।

पद्मभूषण राजेश्वर आचार्य ने बताया कि पंडित छन्नूलाल मिश्र को शास्त्रीय और उपशास्त्रीय संगीत को जोड़ने में महारथ हासिल था, जिसके कारण उन्होंने संगीत जगत में अपनी विशेष जगह बनाई. छोटी गैबी स्थित अपने आवास में वो दिनभर संगीत की साधना किया करते थे. उन्होंने ठुमरी, चैती, कजरी जैसे गायन से शिखर तक की यात्रा को पूरा किया था. उनका जाना संगीत जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है।

पंडित छन्नूलाल मिश्रा का जन्म 3 अगस्त 1936 को यूपी के आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में हुआ था. संगीत की शुरुआती शिक्षा उन्होंने अपने पिता से ली थी. बाद में वे काशी चले आये थे. भारत सरकार ने 2010 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया था. फिर 2014 में वें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक भी बने थे. साल 2020 में उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से नवाजा गया. इसके अलावा भी वे कई राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं।

पंडित छन्नूलाल मिश्र का जाना एक बड़ा झटका है, जो संगीत जगत के लिए एक अपूर्णीय क्षति है. उनकी याद में हमेशा उनके संगीत की साधना और उनके जीवन से जुड़े किस्से याद रखे जाएंगे.

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