Uttar Pradesh

अमेरिकी टैरिफ भारत पर: मुरादाबाद के 70 प्रतिशत निर्यात पर ट्रंप वाला संकट… दांव पर 2000 करोड़ रुपए! कैंसिल हुए कई ऑर्डर – उत्तर प्रदेश समाचार

मुरादाबाद के निर्यातकों को 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने शहर के निर्यात कारोबार को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। मुरादाबाद पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है, जहां पीतल के उत्पाद देश-विदेश में एक्सपोर्ट किए जाते हैं।

लेकिन इन दिनों पीतल नगरी के इस शहर में पीतल कारोबारी मंदी की वजह से चिंतित हैं। अमेरिका की ओर से 27 अगस्त की रात से लागू हुए टैरिफ ने महानगर के निर्यात कारोबार की कमर तोड़ दी है। मुरादाबाद के निर्यातकों के ऑर्डर लगातार रद्द होने से उन्हें अब तक 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। इसके साथ ही निर्यात फैक्ट्री में छंटनी का दौर शुरू हो गया है और हजारों कारीगर बेरोजगारी की कगार पर पहुंच गए हैं।

मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष मोहम्मद नोमान मंसूरी ने बताया कि जिस तरह से अमेरिका ने पिछले दिनों टैरिफ लगाया था, तो 3 महीने का समय दिया था। जिसकी वजह से एक्सपोर्टर्स की जो शिपमेंट थी, वह उस बीच में चली गई थी। जिस तरीके से टैरिफ लगाया गया है, उससे काफी मंदी आती जा रही है। हमारे जो कारखाने चल रहे थे, वह पहले से ही बहुत डाउन स्थिति में थे और बंद होने की कगार पर थे। हम भी सरकार से यही गुहार लगा रहे हैं कि निर्यातकों को राहत पैकेज मिलना चाहिए, जिससे निर्यातक मंदी की समस्या से बाहर निकल सकें।

मुरादाबाद के 70 प्रतिशत निर्यात पर संकटमुरादाबाद का 50 से 70 प्रतिशत निर्यात कारोबार अमेरिका से जुड़ा है। ऐसे में टैरिफ लागू होने के बाद स्थिति को संभालना बेहद मुश्किल हो गया है। निर्यातकों और कारखानों के मालिकों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए, ताकि निर्यात उद्योग और उससे जुड़े लाखों कारीगरों के रोजगार को बचाया जा सके। इसके साथ ही बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में भी छंटनी हो रही है। लोग बेरोजगार हो रहे हैं, उस पर भी अंकुश लग सके।

मुरादाबाद के निर्यातकों को अब तक 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। अमेरिका में क्रिसमस सीजन से पहले माल समय पर नहीं पहुंचा तो बायर्स उसे लेने से इंकार कर देंगे। इस वजह से करोड़ों रुपये के ऑर्डर पहले ही कैंसिल हो चुके हैं। अनुमान है कि अब तक का नुकसान 2000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और यह आंकड़ा दिन-ब-दिन बढ़ रहा है।

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