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Conduct Disorder When Your child is extremely quarrelsome and behaving strangely | Conduct Disorder: हद से ज्यादा झगड़ालू और अजीब बर्ताव कर रहा है आपका बच्चा, कहीं इस परेशानी का शिकार तो नहीं?



What is Conduct Disorder: कंडक्ट डिसऑर्डर एक मेंटल और बिहेवियर से जुड़ा डिसऑर्डर है, जो खासतौर से बच्चों और किशोरों में देखा जाता है. इसमें इंसान का बिहेवियर सामाजिक नियमों, कानून, और दूसरों के हक के खिलाफ होता है. ऐसे बच्चे या किशोर झगड़ालू, अग्रेसिव, झूठ बोलने वाले, चोरी करने वाले, या हिंसक नेचर के हो सकते हैं. ये सिर्फ “शरारती” या “जिद्दी” होने की स्थिति नहीं है, बल्कि ये एक सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम है, जिस पर वक्त रहते ध्यान देना जरूरी है.

कंडक्ट डिसऑर्डर क्यों होता है?
कंडक्ट डिसऑर्डर के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जो बायोलॉजिकल, साइकोलॉजिकल और सोशल फैक्टर्स से जुड़े होते हैं.
1. बायोलॉजिकल फैक्टर्स (Biological Factors)
ब्रेन के कुछ हिस्सों, जैसे फ्रंटल लोब, का सही तरह से डेवलप न होना.
न्यूरोट्रांसमीटर (ब्रेन के केमिकल मैसेंजर) में इम्बैलेंस.
जेनेटिक प्रीडिस्पोजीशन- परिवार में किसी को मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानी रही हो.
2. साइकोलॉजिकल फैक्टर्स (Psychological Factors)
बचपन में इग्नोरेंस, शोषण या हिंसा का एक्सपीरिएंस.
माता-पिता के साथ इमोशनल अटैचमेट की कमी.
सेल्फ कंट्रोल और हमदर्दी की कमी महसूस हुई हो.
3. सोशल फैक्टर्स (Social Factors)
अनस्टेबल पारिवारिक माहौल, माता-पिता में लगातार झगड़े.
4. गलत संगत (Peer Influence)
गरीबी, सामाजिक भेदभाव, और शिक्षा की कमी के कारण भी ऐसा हो सकता है. 
यह भी पढ़ें- “सिर घूमे चक्कर खाए” बॉडी और माइंड का बैलेंस बिगाड़ सकती है ये परेशानी, ऐसे करें खुद को सेफ 
कंडक्ट डिसऑर्डर के लक्षण
कंडक्ट डिसऑर्डर के लक्षण 4 बड़ी कैटेगरी में देखे जाते हैं:
1. लोगों और जानवरों के प्रति अग्रेसिवनेस.
2. झगड़ालू या मारपीट करने की आदत.
3. जानवरों को चोट पहुंचाना या मारना.
4. हथियार का इस्तेमाल करना.
5. धमकाना या डराना.
6. संपत्ति को नुकसान पहुंचाना
7. जानबूझकर आग लगाना.
8. दूसरों की चीजों को तोड़ना या नुकसान पहुंचाना.
9. धोखाधड़ी या चोरी
10. बार-बार झूठ बोलना.
11. बिना इजाजत के सामान लेना (चोरी).
12. लोगों को धोखा देना.
13. नियमों का गंभीर उल्लंघन
14. घर से बार-बार भाग जाना.
15. स्कूल से लगातार एब्सेंट रहना.
16. घर के नियमों को बार-बार तोड़ना.
इन लक्षणों का लगातार और लंबे समय तक बने रहना कंडक्ट डिसऑर्डर की ओर इशारा करता है.

कंडक्ट डिसऑर्डर का डायग्नोसिस
डायग्नोसिस करते समय मेंटल हेल्थ एक्सपर्च (Psychiatrist/Psychologist) कई तरीकों का इस्तेमाल करते हैं:
1. क्लिनिकल इंटरव्यू: बच्चे और माता-पिता से डिटेल से बातचीत करके बिहेवियरल पैटर्न को समझा जाता है.
2. बिहेवियरल ऑब्जर्वेशन: स्कूल, घर, और सामाजिक वातावरण में बच्चे के बिहेवियर का एनालिसिस.
3. मेंटल हेल्थ स्केल और सवाल पूछना: जैसे DSM-5 criteria के आधार पर जांच.
4. दूसरे मेंटल डिसऑर्डर को बाहर करना: जैसे ADHD, Oppositional Defiant Disorder (ODD), या डिप्रेशन.
अगर लक्षण 6 महीने से ज्यादा समय तक मौजूद हों और सोशल, एजुकेशनल, या फैमिली लाइफ पर असर डाल रहे हों, तो डायग्नोसिस की जरूरत बढ़ जाती है.

इसका इलाज कंडक्ट डिसऑर्डर का इलाज मल्टीडिसिपिलिनरी (Multidisciplinary) होता है, जिसमें साइकोलॉजिकल थेरेपी, परिवार की भागीदारी, और कभी-कभी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है.
1. साइकोथेरपी 
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT): सोचने और रिएक्ट करने के तरीके में बदलाव लाकर अग्रेसिवनेस और नेगेटिव बिहेवयर कम करना.
सोशल स्किल ट्रेनिंग: बच्चे को सही तरीके से बातचीत करना, हमदर्दी विकसित करना और गुस्से पर कंट्रोल करना सिखाना.
2. फैमिली थेरेपी
माता-पिता को पॉजिटिव डिसिप्लिन और कम्यूनिकेशन सिक्ल सिखाना.
घर के माहौल को सेफ और स्टेबल बनाना.
3. ग्रुप थेरेपी
बच्चों को ऐसे ग्रुप में शामिल करना, जहां वे पॉजिटिव बिहेवियर सीख सकें.
दवाइयां (Medications)
अगर बच्चे में ज्यादा अग्रेसिवनेस, डिप्रेशन, या ADHD जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर दवाएं दे सकते हैं.

क्या प्रिवेंशन मुमकिन है?
कंडक्ट डिसऑर्डर को पूरी तरह रोकना हमेशा मुमकिन नहीं होता, लेकिन शुरुआती कदम उठाकर रिस्क कम किया जा सकता है.
बच्चे के साथ इमोशन बनाए रखें.
डिसिप्लिन के साथ प्यार और सपोर्ट दें.
सही तरह के दोस्तों की संगत और पॉजिटिव माहौल दें.
परेशानी के शुरुआती संकेत दिखते ही साइकोलॉजिकल हेल्प लें.

इस बात को समझेंकंडक्ट डिसऑर्डर सिर्फ “बदमाशी” नहीं, बल्कि एक सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम है, जो बच्चे और उसके आसपास के लोगों के जिंदगी को गहराई से अफेक्ट कर सकती है. इसका समय पर पता लगाना, सही डायग्नोसिस, और इलाज बेहद जरूरी है. माता-पिता, शिक्षक, और समाज- सभी को इस परेशानी के प्रति जागरूक होकर मिलकर कदम उठाने चाहिए, ताकि बच्चे का भविष्य सही दिशा में आगे बढ़ सके.
(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मक़सद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.)



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