Virat Kohli: भारत और पाकिस्तान, दो ऐसे देश जो खेल जगत में जब भी आमने-सामने होते हैं तो रोमांच का ट्रिपल डोज देखने को मिलता है. टीम इंडिया के स्टार विराट कोहली ने हाल ही में विम्बलडन में नोवाक जोकोविच के रोमांचक मैच का लुत्फ उठाया. इस बीच उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबले को लेकर भी बात की और कुछ ऐसा कह दिया है जिसके खलबली मची हुई है. विराट और उनकी पत्नी अनुष्का की फोटोज भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं.
क्या बोले कोहली? विराट कोहली ने क्रिकेट और टेनिस की तुलना करते हुए प्रेशर की स्थितियों को समझाया. उन्होंने टेनिस के दिग्गज विजय अमृतराज से बातचीत के दौरान ‘स्टार स्पोर्ट्स’ पर कहा, ‘मुझे लगता है कि दबाव की स्थितियों में अनुभव समान हो सकता है. लेकिन वर्ल्ड कप मैच, भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड कप मैच या सेमीफाइनल या फाइनल में हमारे लिए जो डर और दबाव होता है तो आपके पैर कांपने लगेंगे.’
टेनिस में कैसा होता है प्रेशर?
कोहली ने टेनिस को लेकर कहा, ‘लेकिन ये खिलाड़ी क्वार्टरफाइनल से लेकर फाइनल तक इसका सामना कर सकते हैं, जिसे संभालना मेरे हिसाब से काफी दबाव भरा होता है. मैं टेनिस खिलाड़ियों का बहुत सम्मान करता हूं, क्योंकि वे इस तरह के संयम के साथ खेलते हैं और फिटनेस और मानसिक तौर पर मजबूती स्तर को बनाए रखते हैं.’
अलग-अलग चैलेंज- विराट कोहली
कोहली ने आगे कहा, ‘विभिन्न खेलों में अलग-अलग चैलेंज होते हैं. क्रिकेट में, चुनौतियों में से एक यह है कि आपको लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है. आप सुबह वार्म-अप करते हैं और फिर वापस आकर ड्रेसिंग रूम में इंतजार करते हैं. क्योंकि आपको नहीं पता होता कि आपको कब बल्लेबाजी करनी है. वहां बैठकर, खेल को पढ़ते हुए स्थिति बहुत तेजी से बदलती है. यहां (टेनिस में) शायद आपने परिस्थितियां तय कर रखी हैं आपको पता है कि आप किस स्थिति में जा रहे हैं.’
क्रिकेट में होता है सिंगल चांस
कोहली ने बतौर बल्लेबाज क्रिकेट में चैलेंज के बारे में बताया, ‘क्रिकेट में मेरे कौशल के बारे में एक और चुनौती – बल्लेबाजी. यह है कि आपको केवल एक ही मौका मिलता है. आपके पास वापसी करने का ज्यादा मौका नहीं होता, आप एक गलती करते हैं और आप पूरे दिन ताली बजाते रहते हैं. लेकिन ये खिलाड़ी दो सेट और एक ब्रेक से पीछे हो सकते हैं लेकिन फिर भी वापसी कर सकते हैं और जीत सकते हैं.’
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उन्होंने आगे कहा, ‘दुनिया में क्रिकेट खेलने के लिए बहुत सारे अद्भुत स्टेडियम हैं और बहुत दबाव होता है क्योंकि स्टेडियम में बहुत सारे लोग होते हैं. लेकिन मैं कहूंगा कि यह सेंटर कोर्ट जितना डरावना नहीं था, क्योंकि लोग आपसे बहुत दूर बैठे होते हैं. जब हम पिच पर बल्लेबाजी कर रहे होते हैं, तो प्रशंसक बहुत दूर होते हैं, इसलिए आप अपनी जगह पर खो सकते हैं. आप टिप्पणियां नहीं सुन सकते आप जयकार और हूटिंग नहीं सुन सकते. लेकिन हां अगर मैं वहाँ होता और भीड़ मेरे इतने करीब होती, तो यह मेरे लिए डरावना हो सकता था.’
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