दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है क्योंकि समय पर सही ब्लड ग्रुप का खून नहीं मिल पाता. भारत में ही हर साल लगभग 2.5 लाख यूनिट ब्लड की जरूरत होती है, लेकिन उपलब्धता इससे आधी ही होती है. नतीजतन हर दिन 12 हजार लोगों की मौत सिर्फ खून की कमी से हो जाती है.
लेकिन अब इस गंभीर समस्या का समाधान वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है. जापान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा आर्टिफिशियल यानी कृत्रिम खून तैयार किया है, जिसे किसी भी ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को चढ़ाया जा सकता है. उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में खून की कमी से होने वाली मौतें खत्म हो जाएंगी.
क्या है ये आर्टिफिशियल ब्लड?
इस नए तरह के खून को जापान की नारा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है. इसे ‘हेमोग्लोबिन वेसाइकल’ (HbV) नाम दिया गया है.
यह खून कैसे बनता है?
पहले डोनेट किए गए या एक्सपायर हो चुके खून से हीमोग्लोबिन निकाला जाता है. फिर इस हीमोग्लोबिन को लिपिड की परत में बंद कर छोटे-छोटे सेल बनाए जाते हैं. ये सेल इतने छोटे होते हैं कि शरीर की सूक्ष्म नसों में भी आसानी से घूम सकते हैं.
आर्टिफिशियल ब्लड की खास बातें
– यह खून किसी भी ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को चढ़ाया जा सकता है.- रूम टेंपरेचर पर स्टोर किया जा सकता है. यानी कोल्ड स्टोरेज की जरूरत नहीं पड़ेगी.- इससे किसी तरह के इंफेक्शन का खतरा नहीं रहेगा.
अब तक कहां पहुंचा इसका ट्रायल?
अभी यह ब्लड टेस्टिंग फेज में है. वैज्ञानिकों ने इसका सफलतापूर्वक चूहों पर परीक्षण किया है. इसमें चूहों के 90% खून को इस कृत्रिम खून से बदला गया और उनका ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल सामान्य रहा. अब जल्द ही इसके ह्यूमन ट्रायल शुरू होने की उम्मीद है.
भविष्य की उम्मीद
अगर यह ट्रायल सफल रहा तो यह तकनीक पूरी दुनिया के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है. खासकर भारत जैसे देशों में, जहां हर साल हजारों लोग खून की कमी से मरते हैं, वहां यह तकनीक जीवनदायिनी बन सकती है.
kanpur lamborghini accident: shivam mishra Vs salman khan high profile hit and run case | court verdict | कानपुर लैंबॉर्गिनी केस में आया नया मोड़, क्या शिवम मिश्रा हो जाएगा बरी? सलमान खान सहित इन 3 घटनाओं से समझें
Kanpur Lamborghini Accident Case: कानपुर की सड़कों पर छह लोगों को अपनी तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी से रौंदने वाले…

