Uttar Pradesh

CM के खिलाफ लिखा लेख बना टर्निंग प्वाइंट! सुल्तानपुर के इस लेखक ने मचा दी साहित्य जगत में धूम

सुल्तानपुर- उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला सिर्फ राजनीतिक, सामाजिक और स्वतंत्रता संग्राम के लिए नहीं, बल्कि साहित्य की दुनिया में भी अपना विशेष स्थान रखता है. इस जिले ने देश को कई ऐसे रत्न दिए हैं जिन्होंने अपनी लेखनी से विचारों की क्रांति रच दी. ऐसे ही एक जीवित साहित्यिक धरोहर हैं कमलनयन पांडे, जिनकी कलम ने सुल्तानपुर को वैचारिक साहित्य के नक्शे पर अलग पहचान दिलाई है.

विद्यार्थी जीवन में रखी थी साहित्य की नींवसुल्तानपुर के लंभुआ तहसील क्षेत्र से आने वाले कमलनयन पांडे ने सन् 1980 में साहित्यिक लेखन की शुरुआत की. प्रारंभ में उन्होंने कहानी और कविता को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया, लेकिन समय के साथ उनकी रुचि वैचारिक लेखन और आलोचना की ओर मुड़ गई. इस बदलाव ने न सिर्फ उनकी पहचान को व्यापक किया, बल्कि उन्हें एक गंभीर साहित्यकार के रूप में स्थापित किया.

मुख्यमंत्री के विरुद्ध लेख बना टर्निंग पॉइंट
कमलनयन पांडे ने लोकल18 से बातचीत में एक रोचक किस्सा साझा किया. सन् 1982 में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री के आदेशों की आलोचना करते हुए एक अखबार में लेख प्रकाशित किया था. इस लेख ने जहां सत्ता को असहज किया, वहीं साहित्यिक जगत में कमलनयन पांडे की पहचान को मजबूत आधार मिला. उन्होंने इसे अपने साहित्यिक जीवन का टर्निंग पॉइंट बताया.

शिक्षा और साहित्यिक योगदानभरथीपुर गांव में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने वाले कमलनयन पांडे ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से परास्नातक की डिग्री हासिल की. उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं-

“लोक साहित्य का समाजशास्त्र”

“अवधी लोकगीत: एक अंतर्यात्रा”

“सृजन में संदेश और व्यंग्य”

इन पुस्तकों ने न सिर्फ पाठकों को प्रभावित किया, बल्कि उन्हें आलोचकों से भी सराहना मिली.

सम्मानों से हुआ साहित्यिक योगदान का सम्मानकमलनयन पांडे को उनके विशिष्ट योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं. इनमें प्रमुख हैं-

उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा ‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार

पंडित बृजमोहन स्मृति सम्मान (भोपाल)

जायसी सम्मान

इन सम्मानों ने उनके लेखन की गहराई और समाज के प्रति प्रतिबद्धता को व्यापक मान्यता दी है.

एक जीवित धरोहर, एक प्रेरणा स्रोतकमलनयन पांडे न सिर्फ एक साहित्यकार हैं, बल्कि वे नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा हैं. ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने यह दिखा दिया कि सृजन और विचार की शक्ति किसी भी सीमाओं से परे होती है. सुल्तानपुर की यह जीवित धरोहर आज भी उसी ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ साहित्य सेवा में लगी है.

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