Last Updated:July 02, 2025, 19:13 IST(रिपोर्ट- संजय यादव). वैसे तो आज के दौर में एलोपैथिक इलाज का चलन बढ़ा है, लेकिन हमारे यहां के लोग आज भी कई बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक औषधियों पर भरोसा करते हैं. इसका एक बड़ा कारण यह है कि आयुर्वेद में हर मर्ज का जड़ से इलाज मौजूद है. ऐसी ही एक औषधि है गुंजा, जो अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व न सिर्फ शरीर को ताकत देते हैं, बल्कि कई तरह की बीमारियों से भी राहत दिलाते हैं. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर गुंजा शरीर के लिए अमृत समान साबित हो सकती है. वैसे हमारे यहां ऐसी कई वनस्पतियां पाई जाती हैं जो अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं. इनमें से एक है गुंजा का पौधा. यह जंगलों और खेत-खलियानों में पाया जाता है. गुंजा के पौधे का पंचांग यानी पांचों अंग औषधीय गुणों से समृद्ध हैं. इसमें जड़, तना, पत्ती, फूल और बीज शामिल हैं. इन सभी हिस्सों का उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में किया जाता है. इस पौधे के बीज, पत्तियां और तने में विशेष तत्व मौजूद हैं. ये तत्व कई बीमारियों से लड़ने में सहायक हैं. आयुर्वेदिक चिकित्सा में गुंजा के पौधे का महत्वपूर्ण स्थान है. जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन) ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि गुंजा एक औषधीय पौधा है. इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इसके बीज, तना और पत्ते हमारी सेहत और स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. इसमें कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं. इसमें फैटी एसिड, प्रोटीन, ग्लाइसिराजिन, एब्रिन, एब्रासिन, प्रिकैसिन और एंथोसायनिन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमें कई बीमारियों से बचाते हैं. बस इसका उपयोग सही तरीके से करने की आवश्यकता होती है. वात और पित्त की समस्या में फायदेमंदआयुर्वेद में लाल गुंजा का उपयोग वात और पित्त को संतुलित करने के लिए किया जाता है. यदि किसी व्यक्ति की प्रकृति वात या पित्त प्रधान है, तो लाल गुंजा का सेवन लाभकारी हो सकता है. यह बढ़े हुए वात और पित्त के लक्षणों को कम करने में मदद करता है और शरीर में संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है. मुंह के छालों की समस्या में गुंजा के पत्ते बहुत फायदेमंद माने जाते हैं. यदि किसी के मुंह में छाले हो गए हैं, तो गुंजा की पत्तियों को चबाने से राहत मिलती है और छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं. इसके अलावा, गुंजा की जड़ भी सेहत के लिए उपयोगी होती है और कई तरह की बीमारियों में लाभ पहुंचाती है. त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे फोड़े-फुंसी, खुजली और जलन में लाल गुंजा बहुत लाभदायक हो सकता है. इसके उपयोग के लिए लाल गुंजा के बीजों को अच्छी तरह कूटकर पाउडर बना लें और इस पाउडर को प्रभावित स्थान पर लगाएं. इससे त्वचा को राहत मिल सकती है और जलन या संक्रमण जैसी समस्याओं में सुधार देखा गया है. यह उपाय पूरी तरह प्राकृतिक है, लेकिन इस्तेमाल से पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा. गठिया की समस्या में गुंजा (जिसे रत्ती भी कहा जाता है) काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. इसके लिए आप गुंजा की पत्तियों को पानी में कुछ देर तक उबालें और फिर उस पानी को ठंडा होने दें. अब इस तैयार अर्क को जोड़ों के सूजन वाले हिस्सों पर लगाएं. यह प्राकृतिक उपाय जोड़ों में दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है. नियमित उपयोग से गठिया से राहत मिल सकती है, लेकिन किसी भी औषधीय पौधे के प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. अगर आप बाल झड़ने या गंजेपन की समस्या से परेशान हैं, तो रत्ती (गुंजा) के बीज से बना पाउडर कारगर उपाय हो सकता है. इसके लिए 1 चम्मच रत्ती के बीज का पाउडर लें और उसे तिल के तेल में अच्छे से मिलाएं. अब इस मिश्रण को अपने सिर की त्वचा पर हल्के हाथों से मालिश करते हुए लगाएं. नियमित उपयोग से बालों का झड़ना कम हो सकता है, नई बालों की ग्रोथ भी बढ़ सकती है. साथ ही, यह तेल फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याओं से भी राहत दिला सकता है. प्रयोग से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा क्योंकि गुंजा विषैली प्रकृति का पौधा होता है और इसका सीमित मात्रा में और सही विधि से ही इस्तेमाल करना चाहिए.homelifestyleवो जड़ी-बूटी जो छाले, गठिया और झड़ते बालों में करती है कमाल, जानिए सब कुछ
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