क्रिकेट एक ऐसा खेल है जहां सिर्फ मजा और रोमांच नहीं बल्कि ‘मौत का कुआं’ भी है. इस खेल में टैलेंट ही नहीं बल्कि शारीरिक और मानसिक ताकत भी मैटर करती है. जहां गेंदबाज को फिटनेस के लिए जीतोड़ मेहनत करनी पड़ती है तो दूसरी तरफ बल्लेबाज मौत का खेल खेलता है. हम आपको वो पाइंट बताने जहां रहें हैं जहां गेंद लगने से किसी का भी करियर बर्बाद हो सकता है. क्रिकेट के लिए सालों तक की मेहनत एक झटके में बेकार चली जाएगी. ऐसे में किसी भी बल्लेबाज को ऐसी घातक गेंदों से बचना चाहिए.
इस हिस्से पर लगने से हो सकती है मौत
क्रिकेट के खेल में बल्लेबाजों की सेफ्टी के लिए कई चीजों का ध्यान रखा जाता है. सिर पर हेलमेट से लेकर पैरों में मोटे पैड्स भी होते हैं. लेकिन एक हिस्सा जहां गेंद लग सकती है और लगी तो मौत भी हो सकती है वो है गर्दन. इस हिस्से पर बल्लेबाजों की सेफ्टी के लिए कुछ नहीं होता है, सिर्फ खिलाड़ी बल्ले से ही गर्दन पर आती हुई गेंदों से बच सकता है. इस खेल के इतिहास को पलटें तो एक खिलाड़ी की मौत इस हिस्से में गेंद लगने से हो चुकी है.
कौन था वो प्लेयर?
ऑस्ट्रेलिया के फिल ह्यूज की मौत गर्दन में गेंद लगने से हो गई थी. वह साल 2014 था जब सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर घरेलू टीमों के बीच मुकाबला खेला जा रहा था. इस दौरान गेंदबाज सीन एबॉट की घातक डिलीवरी ह्यूज के गर्दन पर जा लगी. जिसके बाद वह मैदान पर गिर पड़े. कुछ दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उनकी मौत हो गए. शरीर का एक और हिस्सा है जहां लगने से कोई भी बल्लेबाज अपंग भी हो सकता है. जिसके बाद करियर खत्म ही माना जाएगा.
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सिर और रीढ़ में लग जाए तो…
बल्लेबाज के गर्दन के अलावा सिर या रीढ़ जैसे नाजुक हिस्सों पर लगती है, तो यह न केवल गंभीर चोट का कारण बन सकती है, बल्कि स्थायी अपंगता का खतरा भी पैदा कर सकती है. भले ही सिर पर हेलमेट होता है. लेकिन 140 या 150 किमी/घंटा की रफ्तार वाली कन्कशन या गंभीर चोट का कारण बन सकती है. इतिहास में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें खिलाड़ी सिर में चोट के कारण लंबे समय तक खेल से बाहर रहे. इसी तरह रीढ़ की हड्डी भी एक ऐसा हिस्सा है, जिसे चोट लगने पर खिलाड़ी अपंग हो सकता है.
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