Last Updated:June 20, 2025, 16:38 IST(रिपोर्ट: संजय यादव). आज के दौर में भी जब आधुनिक चिकित्सा तेजी से आगे बढ़ रही है, लोग बड़ी से बड़ी बीमारी में आयुर्वेदिक दवाओं पर भरोसा करना नहीं छोड़ते. इसका कारण है आयुर्वेद की वह शक्ति, जो प्रकृति के माध्यम से हर मर्ज का समाधान प्रस्तुत करती है. ऐसी ही एक औषधि है गुलमोहर का पौधा, जो न केवल अपनी खूबसूरती से बल्कि अपने औषधीय गुणों से भी जाना जाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को कई रोगों से राहत दिलाने में मदद करते हैं. वैसे हमारे आस-पास कई ऐसे पेड़-पौधे मौजूद हैं जो स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं. ऐसा ही एक पेड़ है गुलमोहर, जो अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि आयुर्वेद में इसे एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधे के रूप में भी मान्यता प्राप्त है. यह पेड़ सड़कों और पार्कों की शोभा बढ़ाता है. इस पर पीले और लाल रंग के खूबसूरत फूल खिलते हैं. ये फूल न केवल आंखों को सुकून देते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, गुलमोहर का पेड़ कई बीमारियों के इलाज में सहायक है. इसके पत्ते, फूल और छाल में औषधीय गुण पाए जाते हैं जो हमें कई बीमारियों से बचा सकते हैं. जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉ. अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन) ने बताया कि गुलमोहर एक औषधीय पेड़ है. इसके पत्ते, फूल और छाल सेहत और स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. इसमें फ्लेवोनोइड्स, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमें अनेक बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. ल्यूकोरिया की बीमारी में पीले गुलमोहर के तने की छाल का पाउडर या फिर फूलों को सुखाकर तैयार किया गया चूर्ण बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. यह प्राकृतिक उपाय ल्यूकोरिया की समस्या से राहत दिलाने में सहायक है. इसके लिए रोज़ाना सुबह खाली पेट 1 गिलास गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच चूर्ण का सेवन करना चाहिए. बाल झड़ने की समस्या में गुलमोहर की पत्तियों का इस्तेमाल फायदेमंद माना जाता है. इसके लिए गुलमोहर की पत्तियों को सुखाकर उनका चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को गर्म पानी में मिलाकर स्कैल्प पर लगाएं. हफ्ते में दो बार इस प्रक्रिया को अपनाने से कुछ ही दिनों में बाल झड़ने की समस्या में सुधार देखने को मिल सकता है. गठिया की समस्या में पीले गुलमोहर के पत्ते बेहद लाभकारी होते हैं. इसके पत्तों को पीसकर गठिया से प्रभावित हिस्सों पर लगाने से दर्द में राहत मिलती है. इसके अलावा, पत्तों का काढ़ा बनाकर उसकी भाप देने से भी सूजन और दर्द में आराम महसूस होता है. यह एक प्राकृतिक और प्रभावशाली उपाय माना जाता है. दस्त और डायरिया की समस्या में गुलमोहर के तने की छाल का सेवन बेहद फायदेमंद होता है. इसके लिए गुलमोहर के पेड़ की छाल को सुखाकर उसका चूर्ण बना लें. फिर इस चूर्ण के 2 ग्राम मात्रा को पानी के साथ सेवन करें. पेचिश, दस्त या डायरिया जैसी समस्याओं में इसका नियमित सेवन राहत दिलाने में सहायक होता है. बवासीर की समस्या में पीले गुलमोहर के पत्तों का उपयोग लाभकारी होता है. इसके लिए पत्तों को दूध के साथ पीसकर एक लेप तैयार करें और उसे बवासीर के मस्सों पर लगाएं. यह प्राकृतिक उपाय दर्द को कम करने और बवासीर की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है. मुंह के छालों के इलाज में गुलमोहर का उपयोग काफी प्रभावी होता है. यदि मुंह में छाले हो गए हैं, तो गुलमोहर की छाल का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर सेवन करें. यह मिश्रण छालों में तेजी से आराम देता है और उन्हें जल्दी ठीक करने में मदद करता है.homelifestyleमुंह के छाले से लेकर ल्यूकोरिया तक, यह पेड़ है हर बीमारी का इलाज, जानिए फायदे
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