Last Updated:June 17, 2025, 21:18 ISTBamboo Farming tips : बांस की कटाई 4 से 5 साल बाद की जाती है और इससे 40 साल तक पैदावार मिलती है. इनका इस्तेमाल निर्माण सामग्री, फर्नीचर और हस्तशिल्प के कामों में खूब होता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में किसान इस समय बांस की खेती में जुट गए हैं. बांस की खेती से उन्हें अच्छा खासा मुनाफा होता है. इसकी खेती में लागत भी कम है. लखीमपुर खीरी जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसान बांस की खेती करते हैं. बांस 5 साल में तैयार हो जाता है. इसकी बाजारों में काफी डिमांड है. खीरी जिले में किसान अशोक कुमार इस समय बंबूसा प्रजाति के बांसों की खेती कर रहे हैं. इसका उपयोग निर्माण, फर्नीचर और हस्तशिल्प उद्योगों में किया जाता है. बांस के लिए रेतीली या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है, लेकिन यह चिकनी मिट्टी में भी पनप सकता है. बंबूसा प्रजाति तेजी से बढ़ती है और 15-20 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाती है. बांस की कटाई आमतौर पर 4-5 साल बाद की जाती है. इससे 40 साल तक मुनाफा कमाया जा सकता है. बंबूसा बांस से काफी अच्छी उपज मिलती है. किसान भाई बंबूसा, तुलदा, डेड्रोकैलामस स्ट्रिक्टस और बम्बूसा नूटैन्स जैसी प्रजातियों को उगा सकते हैं. बांस की खेती पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि यह मिट्टी के कटाव को कम करने और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने में मदद करती है.homeagricultureबरसात से पहले लगा दें इनमें से कोई एक बांस, फिर कूटिये 40 साल तक पैसे ही पैसे
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