शराब का सेवन अब सिर्फ लिवर के लिए ही नहीं, बल्कि पैंक्रियाज (अग्न्याशय) के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक नई रिसर्च ने खुलासा किया है कि यह आदत अग्न्याशय के कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकती है और वह भी सिर्फ भारी शराब पीने वालों के लिए नहीं, बल्कि कम शराब पीने वालों के लिए भी.
यह अध्ययन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान संस्था (IARC) ने किया है. इसमें एशिया, यूरोप, उत्तर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के करीब 25 लाख लोगों के हेल्थ डेटा का विश्लेषण किया गया. निष्कर्ष चौंकाने वाले रहे. हर दिन सिर्फ 10 ग्राम शराब (लगभग एक ड्रिंक) का सेवन भी अग्न्याशय के कैंसर का खतरा 3% तक बढ़ा देता है.
महिलाओं और पुरुषों में बढ़ा जोखिमजो महिलाएं प्रतिदिन 15-30 ग्राम शराब लेती हैं, उनमें अग्न्याशय के कैंसर का खतरा 12% ज्यादा पाया गया, जबकि पुरुषों में यह खतरा 30-60 ग्राम शराब के सेवन पर 15% तक बढ़ गया. वहीं, 60 ग्राम से ज्यादा शराब पीने वाले पुरुषों में यह खतरा 36% तक बढ़ा. रिसर्च में यह भी पाया गया कि बीयर और स्पिरिट्स जैसी ड्रिंक्स का असर ज्यादा हानिकारक है.
धूम्रपान नहीं, फिर भी खतराअब तक यह माना जाता था कि शराब और कैंसर के बीच की कड़ी शायद धूम्रपान से जुड़ी हो सकती है. लेकिन इस शोध ने स्पष्ट कर दिया है कि नॉन-स्मोकिंग करने वालों में भी शराब से अग्न्याशय कैंसर का खतरा बढ़ता है. यानी शराब खुद ही एक स्वतंत्र खतरा है.
साइलेंट लेकिन जानलेवा कैंसरपैंक्रियाज कैंसर दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में से एक है. इसके लक्षण आमतौर पर शुरुआत में स्पष्ट नहीं होते, जिससे इसका देर से पता चलता है. यह कैंसर दुनिया भर में होने वाले कुल कैंसर मृत्यु का लगभग 5% कारण बनता है. अध्ययन के लेखक पिएत्रो फेरारी के अनुसार, शराब के सेवन की लंबी आदतें गंभीर परिणाम दे सकती हैं. इस रिपोर्ट से साफ है कि शराब का कोई भी लेवल सेफ नहीं है.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
Antibacterial soaps may fuel antibiotic resistance, study suggests
NEWYou can now listen to Fox News articles! A new viewpoint study suggests the use of antibacterial soaps…

