Uttar Pradesh

धरोहर! गांधी-नेहरू के साथी स्वतंत्रता सेनानी रफी अहमद किदवई की विरासत आज भी संजोए है यूपी का ये शहर

Last Updated:May 12, 2025, 13:12 ISTSultanpur News: स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता रफी अहमद किदवई की विरासत आज भी सुल्तानपुर जिले के म्यूज़ियम में जीवित है. यहां उनके व्यक्तिगत सामान जैसे चश्मा और कपड़े सुरक्षित रखे गए हैं. जानिए इस म्यूज़ियम मे…और पढ़ेंX

रफी अहमद किदवई साहब हाइलाइट्ससुल्तानपुर संग्रहालय में रफी अहमद किदवई की वस्तुएं संरक्षित हैं.कपड़े, चश्मा, कप और केतली जैसी वस्तुएं संग्रहालय में देखी जा सकती हैं.रफी अहमद किदवई स्वतंत्रता सेनानी और पहले खाद्य मंत्री थे.सुल्तानपुर: भारत की आजादी की कहानी सिर्फ आंदोलनों की नहीं, बल्कि उन सच्चे नायकों की भी है जिन्होंने देश को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद कराने के साथ-साथ आज़ाद भारत की नींव मजबूत करने में भी बड़ी भूमिका निभाई. इन्हीं सच्चे नायकों में से एक नाम है रफी अहमद किदवई (Rafi Ahmad Kidwai) का. वह सिर्फ स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि आज़ाद भारत के पहले खाद्य एवं कृषि मंत्री भी रहे. 18 फरवरी 1894 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के मौली गांव में जन्मे रफी अहमद किदवई पढ़ाई में तेज थे. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की. कॉलेज के दिनों से ही उनमें देशभक्ति की भावना गहरी थी. यही वजह रही कि जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन का आह्वान किया, तो वे उसमें बढ़-चढ़कर शामिल हुए.

नेहरू से लखनऊ जेल में हुई थी पहली मुलाकातसाल 1922 में रफी अहमद किदवई को पहली बार गिरफ्तार किया गया. उन्हें लखनऊ की जेल में रखा गया, जहां उनकी पहली मुलाकात पंडित जवाहरलाल नेहरू से हुई. यही से दोनों के बीच गहरी वैचारिक दोस्ती शुरू हुई. पंडित नेहरू ही नहीं, उनके पिता मोतीलाल नेहरू भी रफी साहब के विचारों से बेहद प्रभावित थे.

देश के पहले खाद्य एवं कृषि मंत्रीदेश को जब 1947 में आज़ादी मिली, तो पंडित नेहरू के नेतृत्व में जब पहली बार भारत में कैबिनेट बनी, तब 1952 में रफी अहमद किदवई को खाद्य और कृषि मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी गई. अपने कार्यकाल में उन्होंने देश की खाद्य नीति को मजबूत आधार दिया.

सुल्तानपुर से भी जुड़ा रहा गहरा नातारफी अहमद किदवई का संबंध सिर्फ बाराबंकी से ही नहीं था. उनका सुल्तानपुर से भी खास रिश्ता था. यहां के बाबू गणपत सहाय, जो उस दौर के प्रभावशाली व्यक्ति थे, रफी साहब के घनिष्ठ मित्र थे. इसी रिश्ते की बदौलत सुल्तानपुर जनपदीय संग्रहालय में आज भी रफी अहमद किदवई की कई निजी वस्तुएं सहेज कर रखी गई हैं.

म्यूज़ियम में आज भी मौजूद हैं उनकी यादेंसुल्तानपुर जनपदीय संग्रहालय के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार दुबे ने बताया कि रफी अहमद किदवई से जुड़ी कई चीज़ें आज भी वहां मौजूद हैं. इनमें उनके कपड़े, चश्मा, कप और केतली जैसे निजी उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं. इन सामानों को संग्रहालय की गैलरी में सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया गया है. अगर आप रफी अहमद किदवई की विरासत को देखना चाहते हैं, तो संग्रहालय में जाकर ये चीज़ें देख सकते हैं. डॉ. दुबे ने बताया कि सामान को इस तरह रखा गया है कि लोग उनके जीवन को नजदीक से समझ सकें. दर्शन के लिए केवल नाममात्र का शुल्क लिया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आकर इस महान स्वतंत्रता सेनानी की स्मृतियों से जुड़ सकें.
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