Uttar Pradesh

हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की मिसाल है ये गांव, साथ मनाए जाते हैं त्योहार, एक ही जगह है मंदिर, मस्जिद, मजार!

Last Updated:May 09, 2025, 09:44 ISTBallia: आज जब धर्म के नाम पर लोगों में कम ही एकजुटता दिखती है, ऐसे में बलिया का ये गांव हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है. यहां दोनों समुदाय न केवल मिलकर रहते हैं बल्कि एक-दूसरे के तीज त्योहारों का भी हिस्सा बनते …और पढ़ेंX

एक साथ मंदिर, मजार और मस्जिद हाइलाइट्सबलिया का गांव हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है.गांव में मंदिर, मस्जिद और मजार एक साथ हैं.सभी त्योहार हिंदू-मुस्लिम मिलकर मनाते हैं.बलिया. आज हम जनपद के एक ऐसे गांव के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जो गंगा-जमुनी तहजीब के लिए मशहूर है. इस अनोखे गांव की खासियत हैरान करने वाली है. यहां एक साथ मंदिर, मजार और मस्जिद देखने को मिलती हैं. इस गांव के हिंदू और मुस्लिम का आपसी प्रेम बहुत बड़ा संदेश देता है. बलिया जनपद के अखार ग्राम सभा के दादा के छपरा में आज भी गंगा-जमुनी तहजीब पूरी तरह बरकरार है. यहां हर त्यौहार हिंदू-मुस्लिम एक साथ मिलकर बड़े ही अच्छे तरीके से मनाते हैं. जानते हैं विस्तार से.

एक साथ है मंदिर, मस्जिद, मजार!बलिया जिले के दादा के छपरा के रहने वाले हृदयानंद ठाकुर ने कहा कि, “यहां पर एक साथ मंदिर, मस्जिद और मजार है.” यहां पर हिंदू और मुस्लिम में कोई भेदभाव नहीं है. ये गांव तब गंगा-जमुनी तहजीब से मशहूर हुआ जब सन 1988 में बाबा चुप शाह वारसी उर्फ गुमनामी बाबा का मजार बन गया. इसके बाद सन 1990 को दक्षिणेश्वर नाथ महादेव का मंदिर बना, तो वहीं ठीक 2016 में यहीं पर मस्जिद भी बनाकर तैयार किया गया.

मंदिर का मुस्लिम और मस्जिद का हिंदू करते हैं सम्मानवसीम वारसी ने कहा कि, “यहां हिंदू और मुस्लिम एक साथ मिलकर आनंद से रहते हैं.” बात मंदिर, मस्जिद और मजार की हो, तो सब एक हैं. जितना सम्मान वह मस्जिद और मजार का करते हैं, उतना ही सम्मान मंदिर की भी करते हैं. हिंदू भाई के यहां कोई त्यौहार हो, तो उसमें मुस्लिम लोग और मुस्लिम के फंक्शन में हिंदू भाई बहुत सहयोग करते हैं. इसमें कहीं मजबूरी नहीं होती, बल्कि आपसी प्रेम है.

इस गांव में भेदभाव का नामोनिशान नहीं…हरेराम तिवारी ने कहा कि, “यहां हिंदू और मुस्लिम में कोई भेदभाव ही नहीं है. इसलिए यहां मंदिर, मस्जिद और मजार भी एक साथ बनाया गया है. यहां मुस्लिम के कार्यक्रम को हिंदू और हिंदू के कार्यक्रम को मुस्लिम भाई पूरा कराते हैं. यहां पर मंदिर और मस्जिद में कोई अंतर नहीं है. लोगों का मानना है कि, “मंदिर और मस्जिद दोनों ही आस्था और विश्वास का केंद्र हैं.” फर्क किसी का भगवान मंदिर में, तो किसी का भगवान मस्जिद में है.
Location :Ballia,Uttar Pradeshhomeuttar-pradeshहिंदू-मुस्लिम सौहार्द की मिसाल है ये गांव, एक ही जगह है मंदिर, मस्जिद, मजार!

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