What Is Liquid Biopsy: भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और एक बात जो ज्यादातर डॉक्टर बार-बार कहते हैं, वो ये है कि शुरुआती डिटेक्शन जिंदगी बचाते हैं. पारंपरिक रूप से, टिशू बायोप्सी को कैंसर साबित करने के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड के रूप में स्वीकार किया जाता है. सस्पेक्टेड ट्यूमर का एक छोटा सा टुकड़ा सर्जरी के जरिए हटा दिया जाता है और टेस्ट के लिए भेजा जाता है. कभी-कभी, ये मुमकिन नहीं हो पाता है. कुछ ट्यूमर तक पहुंचना मुश्किल होता है. दूसरे स्केलपेल (Scalpel) से छूने पर भी खतरा पैदा करते हैं. इसके अलावा बायोपसी पेनफुल, इनवेसिव और पेशेंट के लिए स्ट्रेसफुल हो सकती है.
क्या है लिक्विड बायोपसी?डॉ. समीर भाटी (Dr. Sameer Bhati) ने बताया कि वैज्ञानिक रूप से, इंटर करने का एक कम इनवेसिव तरीका भी है, जिसे लिक्विड बायोप्सी कहा जाता है. ये खून में कैंसर से जुड़े बायोमार्कर, जिसमें सर्कुलेटिंग ट्यूमर डीएनए (ctDNA), एक्सोसोम या कैंसर से जुड़े प्रोटीन शामिल हैं, उसकी पहचान करने के लिए एक छोटा सा ब्लड टेस्ट है. इस जांच में बहुत कम वक्त लगता है, इसके लिए एनेस्थीसिया या अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं होती है, और ये पेशेंट फ्रेंडली भी है.
लिक्विड बायोपसी के फायदेअसल में जो चीज लिक्विड बायोप्सी को मेडिकल की दुनिया में खास बनाती है, वो ये है कि ये अर्ली स्टेज में कैंसर का पता लगाना शुरू कर सकती है, कभी-कभी तब भी जब पहले दिखने वाले लक्षण भी नजर नही आते हैं. इस तरह, मरीजों का जल्दी इलाज किया जा सकता है, और ट्रीटमेंट कहीं ज्यादा असरदार और कम अग्रेसिव होता है.
डॉक्टर्स के लिए मददगारएक और बड़ा फायदा रियल टाइम मॉनिटरिंग है. लिक्विड बायोप्सी हमें ये पता लगाने के लायक बना सकती है कि इलाज असरदार है या नहीं. मिसाल के तौर पर, ctDNA के लेवल में कमी का मतलब ट्यूमर मास का सिकुड़ना हो सकता है. दूसरी तरफ, इन मार्करों में इजाफा बीमारी का फिर से होना या रेसिस्टेंड के डेवलपमेंट का इशारा दे सकती है. इस तरह ये डॉक्टर्स को थेरेपी एडजस्टमेंट के बारे में वक्त पर और अच्छी तरह से इंफॉर्म्ड डिसीजन लेने के लिए एनकरेज करता है.
इंडिया के नजरिये से क्यों है फायदेमंद?भारत की बात करें तो, बड़ी तादात में एडवांस्ड लेबोरेटरी और कैंसर सेंटर्स ने लिक्विड बायोप्सी को एक सर्विस टेस्ट में बदल दिया है, खासकर ब्रेस्ट, लंग, कोलन और प्रोस्टेट कैंसर के लिए. हालांकि ये अभी भी टिश्यू बायोप्सी को पूरी तरह से रिप्लेस की हालत में नहीं है, लेकिन इस तकनीक ने सचमुच में खुद को एक अहम ऑप्शन के तौर पर स्थापित किया है जब सर्जरी या तो जोखिम भरी हो या पेशेंट ने रिफ्यूज कर दी हो.
कैंसर के इलाज में आएगी क्रांतिग्लोबल स्टडीज प्रॉमिसिंग रिजल्ट्स दिखा रहे हैं, कुछ तो ये भी सुझाव दे रहे हैं कि लिक्विड बायोप्सी स्कैन पर दिखाई देने से कुछ महीने पहले ही कैंसर का पता लगा सकती है. ये कैंसर के ट्रीटमेंट में एक बड़ा बदलाव है. बढ़ती जागरूकता, बेहतर तकनीक और वाइफ अवेलेबिलिटी के साथ, लिक्विड बायोप्सी जल्द ही भारत में कैंसर स्क्रीनिंग का एक कॉमन तरीका बन सकती है. ये फास्ट, सेफ और समझदारी भरा डायग्नोसिस है, फ्यूचर में भी काफी काम आ सकता है.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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