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Childhood bacteria may Cause Colon Cancer in Millennials Generation | मिलेनियल्स को कोलोन कैंसर का खतरा, वजह बचपन में हुआ बैक्टीरिया का सामना, जानिए कैसे



Colon Cancer in Millennials: एक नए स्टडी से पता चला है कि बचपन में कोलन के एक बैक्टेरियल टॉक्सिंस के एक्सपोजर में आने से यंग पेशेंट्स में कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों में इजाफा हो सकता है. कभी बुजुर्गों की बीमारी माने जाने वाले कोलोरेक्टल कैंसर की केस अब कम से कम 27 देशों में युवाओं में बढ़ रहे हैं. 50 साल से कम उम्र के एडल्ट्स में इसके मामले पिछले 20 सालों में हर दशक में तकरीबन दोगुनी हो गई है.
कैसे की गई रिसर्च?इसके कारणों का पता लगाने के लिए, रिसर्चर्स ने 11 देशों के शुरुआती या देर से शुरू होने वाली बीमारी वाले अलग-अलग कोलोरेक्टल कैंसर रिस्क लेवल वाले मरीजों से 981 कोलोरेक्टल कैंसर ट्यूमर के जीन का विश्लेषण किया. कोलन सेल्स में डीएनए म्यूटेशन, जो एस्चेरिचिया कोलाई (Escherichia coli) द्वारा प्रोड्यूस किए गए एक टॉक्सिन, जिसे कोलीबैक्टिन (Colibactin) कहा जाता है, के कारण जाने जाते हैं, 40 साल की उम्र से पहले कोलोन कैंसर डेवलप करने वाले एडल्ट्स में 70 साल की उम्र के बाद डायग्नोज किए गए लोगों की तुलना में 3.3 गुना ज्यादा कॉमन थे.

म्यूटेशन पैटर्न को समझेंरिसर्चर्स ने नेचर (Nature) में बताया कि म्यूटेशन के पैटर्न तब पैदा होते हैं जब बच्चे 10 साल की उम्र से पहले कोलीबैक्टिन के एक्सपोजर में आते हैं. शुरुआती मामलों की हाई इंसिडेंट वाले देशों में म्यूटेशन पैटर्न खास तौर से से प्रिवेलेंट थे.
यूसी सैन डिएगो (UC San Diego) की स्टडी के लीडर लुडमिल् अलेक्जेंड्रोव (Ludmil Alexandrov) ने एक बयान में कहा, “अगर किसी शख्स को 10 साल की उम्र तक इनमें से एक म्यूटेट हो जाता है, तो वो कोलोरेक्टल कैंसर डेवलप करने के लिए समय से दशकों आगे हो सकते हैं, 60 साल की उम्र के बजाय 40 साल की उम्र में हो सकता है.”
कोलीबैक्टिन का रोलअलेक्जेंड्रोव ने कहा, “हमारे द्वारा स्टडी की जाने वाली हर एनवायरनमेंटल फैक्टर या बिहेवियर हमारे जीनोम पर निशान नहीं छोड़ता है. लेकिन हमने पाया है कि कोलीबैक्टिन उनमें से एक है जो ऐसा कर सकता है. इस मामले में, इसका जेनेटिक इमप्रिंट यंग एडल्ट्स में कोलोरेक्टल कैंसर से स्ट्रॉन्ग तरीके से जुड़ा हुआ महसूस होता है.”
इन देशों में दिखा खतरारिसर्चर्स को कुछ देशों, खास तौर से अर्जेंटीना (Argentina), ब्राजील (Brazil), कोलंबिया (Colombia), रूस (Russia) और थाईलैंड (Thailand) से कोलोरेक्टल कैंसर में दूसरे म्यूटेशनल सिग्नेचर मिले हैं. उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि लोकल एनवायरनमेंटल एक्सपोजर भी कैंसर के खतरे में योगदान कर सकते हैं.
क्या है रिसर्चर की रायमैड्रिड (Madrid) में स्पेनिश नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर (Spanish National Cancer Research Center) की स्टडी के को ऑथर मार्कोस डियाज-गे (Marcos Diaz-Gay) ने एक बयान में कहा, “ये मुमकिन है कि अलग-अलग देशों में अलग-अलग अज्ञात कारण हों. इससे टारगेटेड, रीजन स्पेसिफिक प्रिवेंशन स्ट्रैटिजी की संभावना खुल सकती है.”
(इनपुट-रॉयटर्स)
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.



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