आज हम जिस हवा में सांस ले रहे हैं, जिस पानी को पी रहे हैं और जिस खाने को शुद्ध समझकर खा रहे हैं, सबमें माइक्रोप्लास्टिक चुपचाप घुल चुका है. प्लास्टिक के ये अदृश्य कण सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि हमारी सेहत के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं. कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि माइक्रोप्लास्टिक न केवल शरीर में इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है, बल्कि दिमागी के काम, हॉर्मोन बैलेंस और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का भी कारण बन सकता है.
बहुत से लोग सोचते हैं कि पानी उबालने से उसमें मौजूद माइक्रोप्लास्टिक खत्म हो जाता है, लेकिन यह सच नहीं है. उबालने से बैक्टीरिया तो मर सकते हैं, लेकिन प्लास्टिक के कण नहीं. उल्टा, बड़े प्लास्टिक कण टूटकर और ज्यादा खतरनाक बन जाते हैं. इसकी जगह रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) फिल्टर या कार्बन ब्लॉक फिल्टर (1 माइक्रॉन से कम छिद्र वाला) उपयोग करना ज्यादा असरदार होता है. ये 90–99% तक माइक्रोप्लास्टिक हटाने में सक्षम हैं.
समुद्री नमक नहीं, हिमालयन नमक चुनेंअक्सर हम सोचते हैं कि समुद्री नमक नेचुरल होता है, लेकिन सच्चाई ये है कि समुद्र में फैले प्लास्टिक प्रदूषण के कारण ये नमक माइक्रोप्लास्टिक से भरे होते हैं. इसके मुकाबले रॉक सॉल्ट या हिमालयन पिंक सॉल्ट, जो प्राचीन चट्टानों से निकाले जाते हैं, अधिक शुद्ध और सुरक्षित होते हैं.
फल-सब्जी को ऐसे करें साफसिर्फ नल के पानी से धोने से फल और सब्जियों से माइक्रोप्लास्टिक पूरी तरह नहीं हटते. बेहतर तरीका है कि इन्हें बेकिंग सोडा और फिल्टर किए गए पानी में 10-15 मिनट भिगोकर रखें, फिर दोबारा फिल्टर्ड पानी से धो लें. इससे सतही गंदगी और प्लास्टिक कण हट सकते हैं.
बोतलबंद पानी भी सेफ नहींबोतल में बिकने वाला पानी भी माइक्रोप्लास्टिक से मुक्त नहीं होता. प्लास्टिक की बोतलें खुद कण छोड़ती हैं. ऐसे में कांच की बोतल में आने वाला पानी या ऐसे ब्रांड चुनें जो माइक्रोप्लास्टिक फिल्ट्रेशन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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