Sadness Reason: क्या आपको भी कुछ दिनों से ऐसा महसूस हो रहा है कि बिना किसी खास कारण के भी आपका मन हमेशा उदास रहता है? कोई खुशी भी उतनी महसूस नहीं हो रही या हो भी रही तो ज्यादा देर तक टिकती नहीं? क्या आपको भी मन में बार-बार बेचैनी या खाली सा फील हो रहा है? अगर हां, तो यह नॉर्मल नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ गंभीर कारण हो सकते हैं. ऐसे तो मन दुखी होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे एक्सपेक्टेशन, डिससेटिस्फेक्शन, फ्यूचर की चिंता, तुलना या किसी से अटैचमेंट. लेकिन अगर आप लगातार दुखी महसूस कर रहे हैं, तो ये किसी मानसिक बीमारी का कारण हो सकती है. इस खबर में हम आपको ऐसे ही 4 कारण बताएंगे.
मानकिस थकानजैसे बॉडी थका हुआ महसूस करता है, वैसे ही कई बार मेंटली भी व्यक्ति थक जाता है. यह तब होता है, जब किसी व्यक्ति पर लगातार काम का प्रेशर, जिम्मादारियों का बोझ या कोई इमोशनल लड़ाई वो लड़ रहा हो. जब दिमाग लगातार स्ट्रेस में रहता है, तो आपको हर चीज़ बोझ लगने लगती है. यह मानसिक थकान आपके मूड पर असर डालती है और हमेशा दुखी महसूस कराती है.
नींद की कमी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल आपकी नींद और लाइफस्टाइल भी आपके मेंटल हेल्थ पर कहीं न कहीं असर डालती है. नींद मेंटल हेल्थ को बैलेंस रखता है. अगर आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है, तो दिमाग का केमिकल बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे गंभीर मानसीक बीमारी डिप्रेशन का खतरा भी हो सकता है. यह भी हमेशा उदास रहने का एक कारण हे. इसके साथ ही अनहेल्दी लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज की कमी और बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम में मेंटल हेल्थ पर असर डालता है, जिससे व्यक्ति दुखी महसूस करता है.
नेगेटिव थिंकिंग और सेल्फ क्रिटिसिज्मअगर आप हर वक्त नेगेटिल सोचते हैं और बार-बार खुद को कम आंकते हैं, अपने फैसलों को लेकर, खुद को लेकर पछताते रहते हैं, या हर सिचुएशन में खुद को ही गलत साबित करते रहते हैं, तो यह आदत धीरे-धीरे आपके सेल्फ कॉन्फिडेंस को खत्म कर देती है. साथ ही नेगेटिव थिंकिंग आपकी एनर्जी को खत्म करती है और मन में हमेशी दुख का एहसास दिलाती रहती है.
अधूरे या दबे हुए इमोशनल घाव कई बार बचपन की कोई याद, कोई बात दिल में रह जाती है या किसी करीबी से दूरी या पुराना धोखा, हमेशा दिल में रह जाता है. ये इमोशनल घाव अगर समय रहते ठीन न कई जाएं, तो मन में लगातार खालीपन और दुख का कारण बन सकते हैं. कभी-कभी हमेशा पता भी नहीं चलता और हम उन पुरानी चीजे अब भी हमारे अंदर दबी रहती है और हम हर रोज दुखी होते रहते हैं.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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