Short Video Addiction: भारत समेत दुनिया भर में शॉर्ट वीडियोज का एडिक्शन बढ़ता जा रहा है, जिसकी वजह से इसके साइड इफेक्ट्स भी नजर आने लगे हैं. एक रिसर्च में बताया गया है कि ये हमारे माइंड पर कैसे असर करता है. ऐसे में जरूरी है कि हम अपने स्क्रीन टाइम को लिमिट करें और नुकसान होने से बचाएं.
शॉर्ट-वीडियो एडिक्शन का रिस्कचीन के तियानजिन नॉर्मल यूनिवर्सिटी (Tianjin Normal University) और अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स (University of California, Los Angeles) के वैज्ञानिकों के मुताबिक, शॉर्ट-वीडियो एडिक्शन वाले लोग न सिर्फ “शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म का कंपल्सिव और अनकंट्रोल्ड” दिखाते हैं, बल्कि वो दूसरों की तुलना में एक अलग ब्रेन मॉर्फोलॉजी या स्ट्रक्चर भी डेवलप करते हुए दिखाई देते हैं. टीम ने कहा कि इस लत वाले लोग “पर्सनलाइज्ड कंटेंट को हद से ज्यादा कंज्यूम करते हैं, इस हद तक कि ये दूसरी एक्टिविटीज में नेगेटिव तरीके से दखल देता है”.
कैसे की गई रिसर्च?17 से 30 साल की उम्र के 112 लोगों पर ब्रेन स्कैन करने के बाद, रिसर्चर्स ने कहा कि उन्हें ध्यान अवधि, सीखने और मेमोरी के साथ-साथ डिप्रेशन और एंग्जायटी में “कोगनिटिल कमियां” मिलीं. ‘टिक-टॉक ब्रेन’, जिसे कभी-कभी ‘ब्रेन रॉट’ भी कहा जाता है, आमतौर पर टिकटॉक और स्नैपचैट से लेकर इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स तक, शॉर्ट-वीडियो क्लिप में स्पेशलाइजेशन रखने वाले ऐप्स पर लंबे वक्त तक बिताए गए समय से जुड़ा होता है.
बड़ी समस्या बन चुका हैरिसर्चर्स ने साइंस जर्नल न्यूरोइमेज (NeuroImage) द्वारा छापे गए एक पेपर में कहा, “शॉर्ट-वीडियो एडिक्शन एक बढ़ती हुई व्यवहारिक और सामाजिक समस्या के रूप में उभरा है, जो हद से ज्यादा इंगेज करने वाला, पर्सनलाइज्ड और शॉट वीडियो कंटेंट प्रोवाइड करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के व्यापक इस्तेमाल से प्रेरित है.”
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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