Uttar Pradesh

अब थैलेसीमिया के मरीजों को नहीं लगाने होंगे दिल्ली-लखनऊ के चक्कर, झांसी में यहां होंगे 100 टाइप के टेस्ट

Last Updated:April 01, 2025, 14:31 ISTThalassemia Test in Jhansi : झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की सेंट्रल पैथोलॉजी लैब में थैलेसीमिया की जांच जल्द शुरू होगी. अब मरीजों को दिल्ली-लखनऊ जाने की जरूरत नहीं होगी. लैब में 100 प्रकार की जांचे…और पढ़ेंमेडिकल कॉलेज झांसी हाइलाइट्सझांसी में थैलेसीमिया की जांच जल्द शुरू होगी.महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को एनएबीएल मान्यता मिली.लैब में 100 प्रकार की जांचें होंगी.झांसी : महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की सेंट्रल पैथोलॉजी लैब में थैलीसिमिया की जांच जल्द शुरू होगी. इसकी मशीन स्थापित होने के साथ ही ट्रॉयल भी लगभग पूरा हो गया है. करीब एक माह से इसकी मशीन को टेस्टिंग मोड पर रखा गया था. जल्द ही इस जांच को भी अन्य जांचों की सूची में शामिल किया जाएगा. पहले इस जांच के लिए लोगों को दिल्ली, लखनऊ या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था. थैलेसिमिया की उच्च गुणवत्ता की जांच के लिए एनएबीएल (नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्री) से मान्यता पहले ही मिल चुकी है. यह प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज की तीसरी और बुंदेलखंड की पहली लैब है, जिसे एनएबीएल से मान्यता मिली है.

मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से संबद्ध एनएबीएल से साल 2024 के 30 मई और एक जून को आई टीम ने लैब के साथ रोगियों की जांच रिपोर्टों का बारीकी से निरीक्षण किया. रोगियों और तीमारदारों से कई बिंदुओं पर पूछताछ कर रिकॉर्ड बनाया. दिल्ली लौटने के बाद टीम ने बीच-बीच में कई बिंदुओं पर जानकारियां हासिल कीं. एनएबीएल ने हर मानक पर खरा उतरने पर रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को मान्यता दे दी है. अब मेडिकल कॉलेज में यह एक नई सुविधा बढ़ जाएगी.

लैब में होगी 100 टाइप की जांचलैब की गुणवत्ता प्रबंधन के लिए क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर तमिलनाडु, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली आदि से करार हुआ है. ये संस्थाएं प्रत्येक माह सेंट्रल लैब की एक्सटर्नल क्वालिटी कंट्रोल के लिए सैंपल जांच करती हैं. उन्होंने बताया कि सेंट्रल लैब में करीब 100 प्रकार की जांच होती है, इसमें बायोकेमिस्ट्री, हार्मोन, हेमेटोलॉजी आदि हैं. लैब के अंदर प्रतिदिन करीब 5500 जांच की जाती है, इनमें हार्मोन की 30 से अधिक जांचे हैं, जैसे थायराइड, ट्यूमर मार्कर, थैलेसीमिया, फर्टिलिटी टेस्ट आदि. प्राधानाचार्य डॉ. मयंक सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि उच्च गुणवत्ता से की जा रही जांचों के शत-प्रतिशत परिणाम को लेकर मिली है.
Location :Jhansi,Uttar PradeshFirst Published :April 01, 2025, 14:31 ISThomeuttar-pradeshअब थैलेसीमिया के मरीजों को नहीं लगाने होंगे दिल्ली-लखनऊ के चक्कर

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