Uttar Pradesh

मुस्लिम शिल्पगुरु ने पीतल में उकेरी ऐसी कला, जिसे देख हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब ने कहा….वाह!

Last Updated:March 11, 2025, 16:45 ISTमुरादाबाद के शिल्पगुरु इकराम हुसैन ने पीतल के उत्पाद पर हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के प्रतीकों को उकेरकर सांप्रदायिक एकता का संदेश दिया. उन्हें 2022 में नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.X

शिल्पगुरु ने पीतल पर उकेरी चारों धर्मों से जुड़ी कलाकृतिहाइलाइट्सइकराम हुसैन ने पीतल पर चार धर्मों के प्रतीक उकेरे.उन्हें 2022 में नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.कला के माध्यम से भाईचारे और एकता का संदेश दिया.पीयूष शर्मा/मुरादाबाद: “हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सभी आपस में हैं भाई-भाई”- यह लाइन तो आपने कहीं न कहीं जरूर सुनी होगी, लेकिन यूपी के मुरादाबाद में एक मुस्लिम शिल्पगुरु ने इसे हकीकत में बदलकर दिखाया है. उन्होंने अपने बनाए पीतल के एक अनोखे उत्पाद पर चारों धर्मों- हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई के धार्मिक प्रतीकों को उकेरकर सांप्रदायिक एकता का संदेश दिया है. उनका मानना है कि सभी धर्मों के लोग एक ही परिवार का हिस्सा हैं और हमें जात-पात से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे को मजबूत करना चाहिए.

शिल्पगुरु ने दिया धार्मिक एकता का संदेशमशहूर शिल्पगुरु इकराम हुसैन ने अपने एक विशेष पीतल उत्पाद पर हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के धार्मिक प्रतीकों को उकेरा है. इसमें भगवान राधा-कृष्ण, गुरु नानक देव, ईसा मसीह और मक्का-मदीना को दर्शाया गया है. उनका कहना है कि इस कलाकृति के माध्यम से वे समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि सभी धर्मों की जड़ें एक ही हैं, बस उनकी अभिव्यक्ति अलग-अलग है. उन्होंने कहा, “हम सभी एक ही डाल के फूल हैं, बस रंग अलग-अलग हैं. हमें नफरत नहीं, बल्कि प्यार और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए.”

राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मानइकराम हुसैन की इस अनूठी कलाकृति को काफी सराहना मिली है. उनकी इस कला और सामाजिक सद्भावना के संदेश को देखते हुए भारत सरकार ने 28 नवंबर 2022 को उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया था. इस पुरस्कार के तहत उन्हें एक लाख रुपये की धनराशि भी दी गई थी. उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की गंगा-जमुनी तहजीब के लिए है.

कला के माध्यम से भाईचारे का संदेशइकराम हुसैन का मानना है कि कला किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होती. यह समाज को जोड़ने और सकारात्मक संदेश देने का एक सशक्त माध्यम है. वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी जाति और धर्म से ऊपर उठकर एक-दूसरे के साथ प्रेम और सौहार्द से रहे. उनके अनुसार, “धर्म हमें बांटने के लिए नहीं, बल्कि जोड़ने के लिए हैं.”उनकी इस पहल ने साबित कर दिया है कि भाईचारा और एकता केवल शब्दों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि इसे अपने कार्यों के जरिए भी दर्शाया जाना चाहिए.
Location :Moradabad,Uttar PradeshFirst Published :March 11, 2025, 16:45 ISThomeuttar-pradeshमुस्लिम शिल्पगुरु ने पीतल में उकेरी ऐसी कला, जिसे देख हिंदू, मुस्लिम, सिख…

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