दुनिया भर में करीब 5 अरब लोग यानी दुनिया भर की दो-तिहाई आबादी को मेडिकल ऑक्सीजन की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है. यह चौंकाने वाला खुलासा हाल ही में प्रकाशित लैंसेट ग्लोबल हेल्थ कमीशन ऑन मेडिकल ऑक्सीजन सिक्योरिटी की रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कम और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता में सबसे ज्यादा असमानता पाई गई है, जिससे लाखों मरीजों की जान को खतरा बना हुआ है.
मेडिकल ऑक्सीजन सर्जरी, अस्थमा, ट्रॉमा, मातृ एवं शिशु देखभाल, फेफड़ों के रोगों (COPD) और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में अनिवार्य भूमिका निभाती है. यह किसी भी देश की महामारी से निपटने की क्षमता का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन की भारी किल्लत ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था, जिससे लाखों लोगों की जान चली गई थी.
सबसे ज्यादा संकट किन देशों में?रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरतमंद 82% आबादी कम और मध्यम आय वाले देशों में रहती है. इनमें से करीब 70% लोग दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया, प्रशांत क्षेत्र और सब-सहारा अफ्रीका में केंद्रित हैं. सब-सहारा अफ्रीका में 91% मरीजों को मेडिकल ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. दक्षिण एशिया में यह आंकड़ा 78% है. वहीं, ग्लोबल लेवल पर, 70% जरूरतमंद मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पाती.
भारत में मेडिकल ऑक्सीजन संकटरिपोर्ट के अनुसार, भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की भारी किल्लत देखी गई, खासकर कोरोना महामारी के दौरान. भारतीय स्वास्थ्य संगठन वन हेल्थ ट्रस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी ने न केवल संक्रमण की गंभीरता के कारण संकट पैदा किया, बल्कि जीवन रक्षक संसाधनों, विशेष रूप से मेडिकल ऑक्सीजन की भारी कमी भी इसकी एक बड़ी वजह थी. कोरोना के दौरान, अस्पताल मुख्य रूप से थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर निर्भर थे, लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण कालाबाजारी और जमाखोरी जैसी समस्याएं सामने आईं. सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए लोगों की गुहार और कोर्ट द्वारा सरकार को ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करने के आदेश तक देने पड़े.
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