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If you suddenly have trouble breathing then be alert know the dangerous truth about Guillain-Barré syndrome | अगर अचानक सांस लेने में तकलीफ हो तो सतर्क हो जाएं, जानें गुइलेन-बैरी सिंड्रोम से जुड़ी खतरनाक सच्चाई



अगर आपको अचानक सांस लेने में परेशानी हो रही है और सामान्य उपायों से राहत नहीं मिल रही, तो इसे हल्के में न लें. यह गुइलेन-बैरी सिंड्रोम (GBS) का संकेत हो सकता है, जो एक दुर्लभ लेकिन गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है.
गुइलेन-बैरी सिंड्रोम एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से नर्वस सिस्टम पर हमला कर देता है. इससे हाथ-पैरों में कमजोरी, झुनझुनी और बैलेंस खोने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लेकिन जब यह बीमारी सांस लेने वाली मसल्स को प्रभावित करती है, तो स्थिति जानलेवा हो सकती है.
सांस लेने में तकलीफ क्यों होती है?दिल्ली स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजिस्ट विभाग के डायरेक्टर डॉ. विकास मित्तल बताते हैं कि GBS के कारण डायाफ्राम (सांस लेने की मुख्य मांसपेशी) कमजोर हो जाता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और कार्बन डाइऑक्साइड जमा होने लगता है. इसे टाइप 2 रेस्पिरेटरी फेल्योर कहा जाता है. ऐसे मरीजों को तेज सांस फूलना, ऑक्सीजन लेवल गिरना और मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिख सकते हैं. इसके अलावा, जब मरीज खांसने में असमर्थ हो जाते हैं, तो फेफड़ों में बलगम जमा होने लगता है, जिससे संक्रमण और न्यूमोनिया का खतरा बढ़ जाता है. अगर गले और मुंह की मसल्स प्रभावित होती हैं, तो मरीज को खाना निगलने में दिक्कत हो सकती है, जिससे एस्पिरेशन न्यूमोनिया का खतरा रहता है.
कैसे करें पहचान और इलाज?GBS में सांस की गंभीर समस्या 20-30% मरीजों में देखने को मिलती है. ऐसे में जरूरी है कि मरीज के ऑक्सीजन लेवल की मॉनिटरिंग की जाए और जरूरत पड़ने पर आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट (ABG) करवाया जाए. अगर ऑक्सीजन की कमी गंभीर हो, तो मरीज को तुरंत वेंटिलेटर पर रखना पड़ सकता है. हल्के मामलों में सिर्फ ऑक्सीजन सपोर्ट या नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन से सुधार हो सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में ट्रैकियोस्टॉमी (गले में सांस नली डालना) की जरूरत पड़ सकती है.
फिजियोथेरेपी और रिकवरी की भूमिकाGBS के मरीजों के लिए फिजियोथेरेपी बेहद जरूरी होती है, जिससे फेफड़ों से बलगम बाहर निकल सके और संक्रमण का खतरा कम हो. सही समय पर इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं, हालांकि कुछ मामलों में हल्की-फुल्की कमजोरी बनी रह सकती है.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.



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