पीलीभीत : वैसे तो बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है जो कभी भी विकराल रूप ले कर जनजीवन अस्त-व्यस्त कर सकती है. लेकिन कुछ स्थायी बचाव कार्य के द्वारा बाढ़ से होने वाली तबाही को काफी हद तक रोका जा सकता है. इन्हीं बचाव कार्यों की मांग पीलीभीत में शारदा नदी के किनारे बसे ग्रामीण दशकों से करते आ रहे हैं. अब इसे कुदरत का कहर कहें या फिर सिस्टम की नाकामी, बीते साल में शारदा नदी पर बनाया गए अस्थाई तटबंध बाढ़ की एक लहर भी नहीं रोक सके. फिलहाल एक बार फिर से शारदा किनारे बसे वाशिंदों की उम्मीद जागी है.शारदा नदी लाखों लोगों के लिए प्राणदायिनी साबित होती है. लेकिन पीलीभीत का एक इलाका ऐसा भी है जहां शारदा नदी का बढ़ा जलस्तर लोगों के लिए आफत का सबब बन जाता है. वहीं स्थानीय लोगों को एक ही साल में कई बार प्रकृति की मार झेलनी पड़ती है. वर्ष 2024 में ट्रांस शारदा के ग्रामीणों ने 2 बार बाढ़ का दंश झेला, कई किसानों की फसलें तो कई किसानों की समूची जमीन ही शारदा में समा गई है.डूब गए बाढ़ में 20 करोड़ रुपए के उपायमुख्य तौर पर शारदा नदी पीलीभीत जिले के कलीनगर व पूरनपुर तहसील से होकर गुजरती है. दोनों तहसीलों में दर्जनों गांव ऐसे हैं जो शारदा नदी से होने वाले कटान और बाढ़ की जद में आते हैं. बाढ़ के इस प्रकोप को देखते हुए बीते वर्ष शारदा नदी के तटों पर तकरीबन 20 करोड़ रुपए की लागत से अस्थाई बचाव कार्य किए गए थे. लेकिन शारदा नदी की पहली ही बाढ़ में यह तटबंध नदी में समा गए.विशषज्ञों की टीम ने किया आकलनजनप्रतिनिधियों की पैरवी के बाद एक बार फिर से शारदा पर स्थाई बचाव कार्यों के शुरु होने की उम्मीद जागी है. हाल ही में पुणे से आई विशषज्ञों की टीम ने नदी के अलग-अलग तटों का स्थलीय निरीक्षण किया है. विशेषज्ञों ने शारदा नदी के रुख भौगोलिक स्थितियों का निरीक्षण किया है. जिसके बाद पूरी स्थिति की अंतिम रिपोर्ट बनाई जाएगी, जिसके आधार पर बचाव कार्यों की रूपरेखा तैयार की जाएगी.FIRST PUBLISHED : December 7, 2024, 20:48 IST
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