शाहजहांपुर : किसी भी फसल की बुवाई से पहले बीज उपचार और भूमि उपचार करना एक बेहद ही अहम प्रक्रिया है. किसान जैविक और रासायनिक तरीके से भूमि उपचार करने के तरीके अपनाते हैं. ऐसा ही है कि जैविक उत्पाद है ट्राइकोडर्मा, जो कम खर्चे में बेहतर परिणाम देता है, किसानों को भूमि उपचार करने के लिए ट्राइकोडर्मा का मिश्रण तैयार करते समय खास बातों का ध्यान रखना चाहिए. जिसे बेहतर परिणाम लिया जा सके.कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनपी गुप्ता ने बताया कि भूमि जनित रोगों से फसल को बचाने के लिए जरूरी है कि किसी भी फसल की बुवाई करने से पहले भूमि उपचार करना चाहिए . भूमि उपचार करने के लिए किसान ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल कर सकते हैं. ट्राइकोडर्मा एक जैविक फफूंदीनाशक है. जिसको गोबर की सड़ी हुई खाद में मिलाकर मिट्टी में मिलाया जाए तो फसलों को भूमि जनित रोगों से बचाया जा सकता है.ऐसे करें इस्तेमालगौरतलब है कि 1 से 2 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा 1 एकड़ के लिए पर्याप्त होता है. किसान 50 से 60 किलो गोबर की सड़ी हुई खाद लेकर उसमें 1से 2 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा मिलाकर किसी छायादार स्थान पर ढक दें. अगर गोबर की सड़ी हुई खाद में पर्याप्त नमी न हो तो किसान उस पर पानी की छिड़क सकते हैं. ट्राइकोडर्मा और गोबर की खड़ी हुई खाद के मिश्रण को छायादार स्थान पर रखकर, घास या पुआल से ढक दें. 7 दिनों के बाद यह मिश्रण पूरी तरह से तैयार हो जाएगा. तैयार मिश्रण को खेत में अंतिम जुताई के समय बिखेर दें. ध्यान रखें कि ट्राइकोडर्मा मिश्रण को सुबह या शाम के वक्त ही खेत में बिखरे और तुरंत जुताई कर दें.FIRST PUBLISHED : November 28, 2024, 16:31 IST
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