पीलीभीत. उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व उत्तराखंड के साथ ही साथ नेपाल से भी सीमा साझा करता है. इस कारण पीलीभीत टाइगर रिजर्व वन्यजीवों से जुड़े अपराधों के लिहाज से काफी अधिक संवेदनशील माना जाता है. समय-समय वन्यजीवों से जुड़े अपराधों को लेकर भारत और नेपाल के मध्य सूचनाओं के आदान प्रदान को लेकर बैठक भी आयोजित की जाती है. पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ, तेंदुआ समेत कई दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीव पाए जाते हैं .जिससे यहां वन्यजीव अपराध भी ज्यादा होते हैं.गौरतलब है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व कुल 5 रेंजों में बांटा गया है. जिसमें माला, महोफ, बाराही, हरिपुर व दियोरिया रेंज शामिल हैं. एक तरफ जहां महोफ रेंज उत्तराखंड से तो वहीं दूसरी ओर बाराही रेंज नेपाल की शुक्लाफांटा वाइल्डलाइफ सेंचुरी साझा करते हैं. वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज़ से यह इलाके काफी अधिक संवेदनशील माने जाते हैं. इसी के चलते भारत और नेपाल दोनों की ओर से ही समय समय पर इसको लेकर तमाम बैठकें व अभियान चलाए जाते हैं. आज पीलीभीत टाइगर रिजर्व के चूका बीच पर नेपाल और भारत के मध्य जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. बैठक में मुख्य रूप से वन्यजीवों की सुरक्षा पर चर्चा व संयुक्त गश्त पर जोर दिया गया. इसके साथ ही पर्यटन की संभावनाओं पर भी विचार विमर्श किया गया.नेपाल के अधिकारियों ने उठाया टाइगर सफारी का लुत्फपीलीभीत टाइगर रिज़र्व में हुई बैठक के बाद नेपाल से बैठक में शिरकत करने आए अधिकारियों ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सैर का भी लुत्फ उठाया. हालांकि नेपाल के अधिकारियों को पीटीआर के भारी भरकम बाघों का दीदार नहीं हो सका. पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि समय-समय पर पड़ोसी देश नेपाल के अधिकारियों के साथ वन्यजीव संरक्षण को लेकर चर्चा की जाती है. वहीं सूचनाओं के आदान प्रदान पर विशेष ध्यान दिया जाता है.FIRST PUBLISHED : November 27, 2024, 23:11 IST
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