Uttar Pradesh

Traditions: शादी से पहले जरूर की जाती है घूरे की पूजा, क्या है ये परंपरा, कैसे हुई शुरुआत? जानें पूरी कहानी विस्तार से

मथुरा: भारतीय संस्कृति के अनुसार सभी मांगलिक कार्यक्रमों में श्री गणेश महाराज का पूजन बेहद खास होता है. खास होने के साथ-साथ गणेश जी जिस घर में वास करते हैं, उस घर में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं रहती. शादी-विवाह के घरों में शादी के पूर्व निभाई गई रस्मों में भी गणेश जी का पूजन बेहद अहम होता है. घूरा पूजन की परंपरा कब से चली आ रही है, इसे क्यों और कैसे किया जाता है, जानते हैं.

अपनी जिंदगी की नई शुरुआत के लिए मंगल कामना करते हैंविघ्नहर्ता गणपति महाराज के बिना सभी मांगलिक कार्यों को अधूरा माना जाता है. चाहे वह शादी की रस्म हो चाहे घर के दूसरे छोटे-मोटे कार्यक्रम. सभी में भगवान गणेश की उपस्थिति अनिवार्य होती है. ऐसा कहा जाता है कि जिस कार्यक्रम के अवसर पर गणेश पूजा नहीं होती है, वह कार्यक्रम अधूरा हो जाता है. यही परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है. शादी विवाह के सीजन आने के बाद गणेश जी महाराज को मनाने के लिए कई प्रयास किए जाते हैं. शादी से पूर्व घूरा पूजन की परंपरा सैकड़ो वर्षों से चली आ रही है.

जिस घर में शादी हो वहां होता है घूरा पूजनलोकल 18 से बातचीत करते हुए ज्योतिषी पंडित अजय तैलंग ने कहा कि सभी मांगलिक कार्यक्रमों में गणेश जी की उपस्थिति होना बेहद जरूरी होती है. विवाह से पूर्व इसलिए गणेश जी की पूजा गौर पूजन के रूप में की जाती है कि वह सुख, समृद्धि, धन, वैभव और सभी कार्यों को सफल बना दें. वर या वधू दोनों के विवाह से पूर्व जब कार्यक्रमों का संचालन होता है, तो विवाह से दो दिन पूर्व इस परंपरा का निर्वहन वर या वधू पक्ष के लोग करते हैं. अगर लड़की की शादी है, तो लड़की के परिजन घूरे पूजन की परंपरा को विधि विधान से करते हैं.

घूरे के पास जाती है होने वाली वधूघर की महिलाएं मांगलिक गीत गाती हुई, लड़की के सिर पर खजूर का बीजना कपड़े से बांधकर उसे घूरे के पास तक ले जाती हैं. महिलाएं लड़की को ले जाती हैं और यहां हल्दी और रोली का सतिया बनती हैं. इस सतिये को बनाने के बाद विधि विधान से आरती कर अपने ईष्ट को याद करती हैं. इसके बाद शादी-विवाह के बाकी कार्यक्रम आगे बढ़ते हैं.

विघ्नहर्ता को मनाने के लिए की जाती है पूजाघर की महिलाओं से जब इस परंपरा और रस्म के बारे में बातचीत की गई तो घर की महिलाओं ने लोकल 18 को बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही हैं. इस परंपरा का निर्वहन बहुत से लोग करते हैं. गणेश का पूजन इसलिए किया जाता है कि गणेश जी मांगलिक कार्यों के राजा होते हैं और राजा को रुष्ट करना भारतीय संस्कृति में वर्जित है.
Tags: Dharma Aastha, Local18, Mathura news, News18 uttar pradeshFIRST PUBLISHED : November 26, 2024, 08:34 IST

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