लखनऊः वैसे तो जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच दिशा-निर्देश को लेकर तनातनी रहती है. लेकिन यूपी में तौलिए को लेकर ठन गई है. दरअसल, प्रदेश के कई विधायकों की यह शिकायत है कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में अधिकारी लोग अपनी कुर्सी पर तौलिया बिछाते हैं और प्रतिनिधियों के लिए साधार कुर्सी लगा देते हैं. अब इस मामले को लेकर सूबे के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने एक इमरजेंसी वीडियो कांफ्रेंस बुलाई ताकि यह तय किया जा सके की प्रशासनिक प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है कि नहीं. हाल ही में सरकार ने आदेश दिया था कि सांसदों, विधायकों और एमएलसी को राज्य में होने वाली बैठकों में अधिकारियों और प्रतिनिधियों की कुर्सी की ऊंचाई बराबर हो और तौलिया से सजाई जाए. कुछ दिन पहले शिकायत मिली थी.उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में हुई चर्चा में हिस्सा लेने वाले विधायकों ने बताया था कि अधिकारी तो खुद ऊंची-सजी हुई कुर्सियों पर बैठते हैं और उनकी तरह अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों को ऐसी कुर्सी पर नहीं बैठाया गया. सतीश महाना से शिकायत करते हुए मुजफ्फरनगर के चरथावल से सामाजवादी पार्टी के विधायक पंकज मलिक ने कहा कि विधायकों को साधारण कर्सियां दी जाती हैं और अधिकारी सफेद तौलिये वाली कुर्सियों पर बैठते हैं. अधिकारी भी सोफों पर बैठे, जबकि विधायकों को साधारण कुर्सी दी गई.
बता दें कि लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश सचिवालय में हफ्ते में दो बार सोमवार और गुरुवार को करीब 1000 तौलिये बदले जाते हैं. सीएम योगी के भगवा रंग को छोड़कर, उनमें से अधिकांश तौलिया सफेद हैं. कई विधायकों खास तौर पर विपक्षी दलों ने बताया कि उनकी कुर्सियां बिना तौलिये के रहती हैं. समाजवादी पार्टी एमएलसी और प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि सरकारी आदेश के बाद भी आधिकारिक बैठकों में कोई खास बदलाव नहीं आया है.FIRST PUBLISHED : November 22, 2024, 13:01 IST
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