मलेरिया एक गंभीर संक्रामक रोग है जो मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है. यह मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटकर परजीवी को अपने शरीर में ले लेता है और फिर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटकर उसे संक्रमित कर देता है. सही समय पर इसका इलाज न कराया जाए, तो पीड़ित की जान भी जा सकती है. हालांकि, दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जो पूरी तरह मलेरिया से फ्री हो चुका है? जी हां, आपने सही सुना! मिस्र को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मलेरिया मुक्त देश घोषित कर दिया है, जिसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में सराहा जा रहा है. मिस्र ने मच्छरों के खिलाफ एक ऐसी जंग जीती है जिससे पूरी दुनिया हैरान है
WHO के प्रमुख टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने इस उपलब्धि को ‘वास्तव में ऐतिहासिक’ बताया. मलेरिया का इतिहास मिस्र की सभ्यता जितना पुराना है, लेकिन अब यह बीमारी देश के भविष्य का हिस्सा नहीं है. मिस्र ने मलेरिया के खिलाफ संघर्ष में एक नया अध्याय लिखा है, जिससे भारत जैसे देशों को बहुत कुछ सीखने की जरूरत है.
इतिहासमिस्र ने 1930 में मलेरिया को एक नोटिफायबल बीमारी घोषित किया था, जब यह बीमारी 40% आबादी में फैली थी. इसके बाद भी देश ने कई बार मलेरिया की गंभीर समस्याओं का सामना किया, जैसे कि 1942 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान और 1969 में असवान डैम के निर्माण के समय, जब स्थिर पानी मच्छरों के प्रजनन का स्थान बन गया था. आज मिस्र उन 43 देशों में शामिल हो गया है, जिन्हें मलेरिया मुक्त का प्रमाण पत्र मिला है. WHO द्वारा मलेरिया उन्मूलन प्रमाणन तब दिया जाता है जब किसी देश ने तीन साल तक मलेरिया के संक्रमण को पूरी तरह से रोका हो.
भारत को मिस्र से क्या सीखने की जरूरत है?भारत में मलेरिया अब भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में. मानसून के दौरान मच्छरों के प्रजनन की स्थिति सबसे उपयुक्त होती है, जिससे यह बीमारी बढ़ जाती है. हालांकि भारत ने मलेरिया के खिलाफ जागरूकता अभियान, कीटनाशक छिड़काव और मेडिकल देखभाल के प्रयास किए हैं, फिर भी कई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और दवाओं के प्रति प्रतिरोधी मलेरिया के मामले अब भी चुनौती बने हुए हैं.
क्या रही मिस्र की रणनीति?मिस्र ने मलेरिया के प्रकोप को रोकने के लिए प्रभावी रणनीतियां अपनाईं. मुफ्त में मलेरिया का निदान और उपचार प्रदान किया, हेल्थ एक्सपर्ट को ट्रेनिंग दिया और पड़ोसी देशों के साथ मजबूत साझेदारी बनाई. भारत को भी इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, रोकथाम उपायों पर ध्यान केंद्रित करना और अधिक खतरे वाले क्षेत्रों पर खास जोर देना चाहिए ताकि मलेरिया फ्री भारत का सपना साकार हो सके.
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