Uttar Pradesh

गोमती नदी से खत्म हो रहे हैं कछुए, तीन प्रजातियां हुईं विलुप्त, बचे कछुओं पर भी मंडरा रहा संकट



अंजलि सिंह राजपूत/लखनऊ : गोमती नदी में कछुओं की तादाद तेजी से घट रही है. तीन प्रजातियां पूरी तरह से विलुप्त हो चुकी हैं. बाकि बची हुई प्रजातियों पर भी खत्म होने का संकट मंडरा रहा है. यह कहना है टर्टल सर्वाइवल एलायंस इंडिया के निदेशक और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. शैलेंद्र सिंह का. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कछुओं की कुल 15 प्रजातियां पाई जाती हैं. वहीं पूरे देश में 29 प्रजातियां मौजूद हैं.

गोमती नदी में कछुओं की प्रजाति ढूंढने के लिए हमेशा से ही स्टडी होती रही हैं. सबसे पहले स्टडी 1993 में हुई थी. उस वक्त आठ प्रजातियां कछुओं की गोमती नदी में पाई गई थीं. बड़ी तादाद में आठ प्रजातियां मिली थी लेकिन जब 2003 में स्टडी हुई जोकि उन्होंने खुद ही की थी यह स्टडी हरदोई से शुरू होकर सुल्तानपुर पर खत्म हुई थी इसमें उन्हें सिर्फ सात प्रजातियां ही कछुओं की गोमती नदी में मिली थी.

बटागुर कछुआ पूरी तरह खत्मडॉक्टर शैलेंद्र सिंह ने बताया कि 2003 में उनके द्वारा गोमती नदी पर जो स्टडी की गई थी उसमें एक प्रजाति होती है बटागुर कछुआ जिसे ढोर प्रजाति कहते हैं यह पूरी तरह से खत्म हो चुकी है. इसके बाद 2007 में उन्हें चित्रा कछुए की जो प्रजाति होती है वो भी दिखाई थी लेकिन अब वो भी नहीं दिखती है. ऐसे में कह सकते हैं कि गोमती नदी से 25 से 30% कछुए अब खत्म हो चुके हैं.

तस्करी और प्रदूषण दोनों हैं कारणआपको बता दें कि गोमती नदी में वर्तमान में 33 नालों का गंदा पानी गिर रहा है. यह हकीकत तब सामने आई जब मंडलायुक्त रोशन जैकब ने 28 अक्टूबर 2023 को नगर निगम की बैठक की थी. इस पर डॉ. शैलेंद्र सिंह ने कहा कि गोमती नदी से कछुओं की तादाद घटने का एक कारण है प्रदूषण और दूसरा है तस्करी क्योंकि पिछले एक साल के दौरान सबसे ज्यादा इंडियन टेंट टर्टल की तस्करी के मामले सामने आए हैं.

आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2021 में लखनऊ से 266 कछुओं को गोमती नदी से तस्कर तस्करी करके हैदराबाद लेकर जा रहे थे जिन्हें पकड़ लिया गया था.नवंबर 2021 को लखनऊ से 250 कछुए तस्कर इंदौर लेकर जा रहे थे इनको भी पकड़ लिया गया था. गोमती नदी से 200 कछुए लेकर तस्कर हरदोई जा रहे थे. इसके अलावा फरवरी 2022 में 318 और अप्रैल 2022 में 160 गोमती नदी से कछुआ तस्कर लेकर जा रहे थे इन सभी को पकड़ लिया गया था.

ये प्रजातियां विलुप्त होने के कगार परस्पॉटेड पाउंड टर्टल और इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल के अलावा इंडियन पीकॉक सॉफ्टशेल टर्टल और इंडियन रुफड टर्टल क्रिटिकली एंडेंजर्ड हैं. वहीं क्राउंड रिवर टर्टल, इंडियन फ्लैपशेल टर्टल, नैरो हेडेड सॉफ्टशेल टर्टल, इंडियन टेंट टर्टल है इनकी संख्या भी तेजी से घट रही हैं.
.Tags: Local18, Lucknow news, UP newsFIRST PUBLISHED : January 3, 2024, 20:40 IST



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