Uttar Pradesh

रामपुर के गरारे ने दुनियाभर में मचाई धूम, कनाडा से लेकर दुबई तक है मांग, मुगलकाल का है यह परिधान



अंजू प्रजापती/रामपुरःआधुनिक युग में फैशन का मतलब पोशाक की वे शैलियां हैं, जो वर्तमान में लोकप्रिय हैं. लेकिन गरारे का फैशन सदाबहार रहता है. हालांकि ये मुगल शासन के दौर का परिधान है. परंतु यह कहना भी बुरा नहीं होगा कि समय के साथ फैशन भी नया पुराने का स्थान ले लेता है. वोकल फॉर वोकल थीम के तहत रामपुर के चटापटी और पटापटी की कला को बेहद पसंद किया जा रहा है.

हस्तशिल्प के क्षेत्र में रामपुर हमेशा से आगे रहा है. फैशन डिजाइनर शैला खान के मुताबिक उनका यह काम 15 साल पुराना है. लेकिन 8 साल से रामपुरी गरारे की लोकप्रियता अधिक हुई. जिसे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में बेचा जाने लगा. हाथ से की गई चटापटी से तैयार गरारे और दुपट्टे की मांग कनाडा, दुबई और पाकिस्तान सहित अन्य देशों से आ रही है. शैला खान ने बताया कि उन्होंने कई महिलाओं को इस काम से जोड़ा जो अपने घरों पर रहकर गरारे पर चटापटी का काम करती हैं. थाना कुंडा नियर इंदिरा स्कूल के पास सुबह साढ़े ग्यारह बजे से शाम 6 तक गरारे बेचे जाते हैं.

दो लाख तक की कीमत के गरारेशैला खान के यहां 11 हजार से लेकर डेढ़ पोने दो लाख तक कि कीमत के गरारे सेल किये जाते हैं. उनके इस कारोबार से करीबन 500 लोगों को रोजगार से जोड़ा गया. जिसमें एक गरारा बनाने के लिए 20 से 25 कारीगर काम करते है. जिसमें एक डायर, दबका जरदोजी, चटापटी पेंटिंग, आरी बनाना, गरारा सिलना, नगो की पेस्टिंग, प्रेसिंग और पैकिंग करना इस तरह केवल एक गरारे को तैयार करने के लिए कई लोगों को रोजगार से जोड़ा गया. चटापटी बनाने के लिए कई प्रकार के कपड़ो की कतरन को छोटे बड़े आकार में कटिंग कर के जोड़ा जाता है. इसके अलावा पटापटी की कला में कटी हुई कपड़ों की पट्टियों को एक साथ आपस में जोड़ा जाता है.
.Tags: Hindi news, Local18, UP newsFIRST PUBLISHED : December 10, 2023, 15:27 IST



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