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रोहित शर्मा की कप्तानी के सपोर्ट में उतरे अश्विन, आलोचकों को सरेआम लगाई लताड़| Hindi News



Rohit Sharma: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड कप फाइनल में हार के बाद से ही रोहित शर्मा की कप्तानी के भविष्य को लेकर बहुत सी चर्चाएं की जा रही हैं. रविचंद्रन अश्विन ने अपने कप्तान रोहित शर्मा का सपोर्ट करते हुए कहा कि उन्हें शतक बनाना सिखाने की जरूरत नहीं है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड कप फाइनल में आक्रामक शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदलने के लिए रोहित शर्मा की आलोचना की जा रही है.
रोहित शर्मा की कप्तानी के सपोर्ट में उतरे अश्विनरोहित शर्मा पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार लय में थे और भारत ने टॉप ऑर्डर में उनके सपोर्ट की बदौलत ही धमाकेदार शुरुआत की. रोहित शर्मा ने 125 के शानदार स्ट्राइक रेट से 11 मैच में 597 रन बनाए. रोहित शर्मा फाइनल में ग्लेन मैक्सवेल को बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में जिस तरह आउट हुए, उसकी कुछ तबकों में आलोचना की जा रही है. रोहित शर्मा ने 31 गेंदों में 47 रनों की पारी खेली, जिससे मजबूत नींव बनी लेकिन टीम इसका फायदा नहीं उठा सकी.
आलोचकों को सरेआम लगाई लताड़
रविचंद्रन अश्विन ने कहा, ‘हर कोई पीछे से कह रहा है कि अगर वह खेलता रहता तो 100 रन बना सकता था, लेकिन यह उनकी इच्छाशक्ति थी कि टीम इस तरह का खेल दिखा सकी. रोहित शर्मा को शतक बनाना सिखाने की जरूरत नहीं है, वह काफी शतक बना चुके हैं लेकिन यह जज्बा है जो मायने रखता है.’ इस अनुभवी ऑफ स्पिनर ने यह भी खुलासा किया कि पिछले रविवार को फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के पहले गेंदबाजी करने के फैसले से भी वह हैरान थे, लेकिन साथ ही पैट कमिंस और चयनकर्ता जॉर्ज बेली की अहमदाबाद की पिच बखूबी पढ़ने के लिए तारीफ की.
रोहित की रणनीति देखकर हैरान रह गए अश्विन 
ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल में भारत को कई मोर्चों पर पछाड़कर छठी बार वर्ल्ड कप जीता. रविचंद्रन अश्विन ने गुरूवार को कहा, ‘ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल में शानदार खेल दिखाया. मैं उनकी रणनीति देखकर हैरान रह गया. ऑस्ट्रेलिया के फैसले से मैं व्यक्तिगत रूप से हैरान हो गया क्योंकि जैसा उनका इतिहास है, वे फाइनल में टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनते हैं.’
अहमदाबाद की मिट्टी ओडिशा की तरह थी
रविचंद्रन अश्विन ने कहा, ‘मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि ऑस्ट्रेलिया को ऐसा ही करना चाहिए क्योंकि कई लोग यह नहीं समझते कि अहमदाबाद की मिट्टी ओडिशा की तरह थी. यह ऐसी ही थी जैसी देश के पूर्वोत्तर हिस्से से ली गयी कोई भी मिट्टी होती, क्योंकि अगर कोई और पिच घुटने तक उछाल लेगी तो इस तरह की पिच पिंडली तक लेगी.’
पारी के बीच में पिच टूट रही थी
रविचंद्रन अश्विन ने यह भी कहा कि द्विपक्षीय सीरीज की संख्या के कारण भारत दुनिया का ‘क्रिकेट केंद्र ‘ बन गया है और साथ ही इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेलकर विदेशी खिलाड़ी पिच और परिस्थितियों से वाकिफ हो रहे हैं. रविचंद्रन अश्विन ने कहा, ‘मैं देख रहा था कि पारी के बीच में पिच टूट रही थी. मैं आस्ट्रेलिया के मुख्य चयनकर्ता जॉर्ज बेली से मिला और पूछा कि आपने हमेशा की तरह टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला क्यों नहीं किया?’ रविचंद्रन अश्विन ने कहा, ‘इस पर उनका जवाब था, हम आईपीएल में खेल चुके हैं और लंबे समय से द्विपक्षीय सीरीज भी खेल रहे हैं और हमारे अनुभव के अनुसार लाल मिट्टी टूटती है, लेकिन काली मिट्टी दूधिया रोशनी में बल्लेबाजी के लिए बेहतर हो जाती है.’
(Source Credit – PTI)



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