Uttar Pradesh

Medical News: क्या है पैलिएटिव केयर? कैंसर के इलाज के दौरान ये क्यों है जरूरी? जानें यहां



अंजलि सिंह राजपूत/लखनऊ. भारत और पूरी दुनिया में कैंसर तेजी से फैल रहा है.ब्रिटेन में हुए एक शोध में बताया गया कि पिछले तीन दशकों में भारत समेत दुनिया भर में युवाओं में कैंसर की बीमारी 28 प्रतिशत की तेजी से बढ़ रही है. इसके पीछे वैज्ञानिकों ने जेनेटिक्स समेत कई कारण बताए हैं. राहत की बात यह है कि समय पर इलाज से कैंसरपर काबू पाया जा सकता है. इलाज में देरी से यह मर्ज गंभीर हो जाता है. ऐसे में इलाज भी कठिन हो जाता है.

जब इलाज के लिए कुछ नहीं बचता है तो मरीजों की दिक्कतों को कम करने में पैलिएटिव केयर की भूमिका बढ़ जाती है. इससे मरीजों के जीवन को आसान बनाने में मदद मिलती है. यह कहना है केजीएमयू रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. राजेंद्र कुमार का, उन्होंने शनिवार को पैलिएटिव केयर डे पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी.

रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि कैंसर मरीजों की भूख में कमी आ जाती है. दर्द की वजह से मरीज चलने-फिरने में लाचार हो जाते हैं. मानसिक रूप से भी मरीज टूटने लगता है.

क्या है पैलिएटिव केयर?रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि ऐसे में पैलिएटिव केयर से मरीजों को राहत दी सकती है. इसमें मरीज की काउंसलिंग की जाती है. केजीएमयू और एनजीओ की टीम आदि मरीजों की मदद में लगाई जाती है. यह टीमें मरीजों के खान-पान से लेकर साफ-सफाई में मदद करती है. मरीज की काउंसलिंग कर ऊर्जा का संचार किया जाता है. डॉ. राजेंद्र कुमार ने कहा कि मरीज के परिजनों की भी काउंसलिंग कराई जाती है. इसमें तीमारदारों को मरीज की देखभाल करने के तौर-तरीके सिखाए जाते हैं.

मरीज को तनाव मुक्त रखता है पैलिएटिव केयरएम्स भोपाल के पूर्व निदेशक डॉ. संदीप कुमार ने कहा कि कैंसर के शुरूआती अवस्था में इलाज आसान होता है. जब बीमारी लाइलाज हो जाती है तो ऐसे मरीजों को पैलेटिव केयर की जरूरत पड़ती है. पैलिएटिव केयर अस्पताल और घर दोनों ही जगहों में दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि पैलिएटिव केयर में मरीज के खाने की नली, यूरीन, स्टूल बैग के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखा जाता है. इससे मरीज की दिक्कतें काफी हद तक कम हो जाती हैं. उन्होंने बताया कि मुंह के कैंसर से पीड़ित मरीजों के ऑपरेशन के बाद चेहरा कुछ विकृत दिखने लगता है. इससे भी मरीज मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं, इससे उबारने के लिए काउंसलिंग की जरूरत होती है.

घातक है कैंसर का अधूरा इलाजकेजीएमयू रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. सुधीर सिंह ने कहा कि कैंसर का इलाज अधूरा छोड़ना घातक होता है. बीमारी का रूवरूप तेजी से बिगड़ने लगता है. लिहाजा कैंसर मरीज डॉक्टर की सलाह पर पूरा इलाज कराएं. जब बीमारी बेकाबू हो जाती तो पैलिएटिव केयर से मरीज को राहत पहुंचाने में काफी कारगर साबित हो रही है. मरीजों को मनपसंद काम करने की सलाह दी जाती है, जैसे उन्हें गीत संगीत, ईश्वर की पूजा आदि के लिए भी प्रेरित किया जाता है. इससे भी मरीज को काफी आंतरिक ताकत मिलती है.
.Tags: Health, Life18, Local18, Lucknow news, Uttar Pradesh News HindiFIRST PUBLISHED : October 14, 2023, 20:56 IST



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