आयुर्वेद के मुताबिक हमारे शरीर की तीन प्रकृति हो सकती हैं- वात, कफ और पित्त. हर प्रकृति की अपनी कुछ खास विशेषताएं हैं और कुछ अलग समस्याएं. जिनका समाधान भी आयुर्वेद बताता है. आयुर्वेद के मुताबिक शरीर में वात, पित्त और कफ दोष संतुलित होने चाहिए. लेकिन आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. रेखा ने ‘वात माइंड’ के बारे में भी बताया है. यानी उन लोगों का दिमाग जिनकी प्रकृति वात दोष से नियंत्रित होती है. ऐसे लोगों का दिमाग एक जगह नहीं रह पाता है. आइए वात माइंड के लक्षण और उसे संतुलित करने के तरीके जानते हैं.
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वात माइंड के लक्षण – Symptoms of Vata Mindआयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. रेखा ने बताया कि अगर निम्नलिखित में से अधिकतर चीजें आपके साथ हो रही हैं, तो आपका दिमाग वात माइंड है. जैसे-
कोई काम करते हुए दिमाग में अन्य चीजों के बारे में विचार आना.
एक ही समय पर सतर्क और बेचैन दोनों होना.
एक चीज पर फोकस करने में समस्या होना.
किसी भी चीज में दिलचस्पी आसानी से खो जाना.
हमेशा कंफ्यूज रहना और निर्णय लेने में मुश्किल होना.
जीवन में बदलाव अच्छे लगते हैं. एक ही जगह या एक ही काम से जल्दी बोरियत महसूस होना.
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कैसे करें वात माइंड को शांत? – tips to balance Vata Mindडॉ. रेखा ने वात माइंड को शांत और संतुलित करने का तरीका भी बताया है. आइए इनके बारे में जानते हैं.
वात की प्रकृति रूखी होती है, इसलिए रोजाना सिर में आर्गेनिक काले तिल के तेल की मसाज करें.
सोने से पहले 5 मिनट पैरों की मसाज करें.
वात की प्रकृति हल्की होती है, इसलिए उसके उलट भारी यानी पृथ्वी के करीब रहें. प्रकृति के करीब जितना रह सकते हों, रहें. घास, मिट्टी, रेत में नंगे पैर चलें. हालांकि, ठंडी सतह पर नंगे पैर ना चलें.
वात की प्रकृति ठंडी भी होती है, इसलिए इसके उलट गर्माहट देने वाली गतिविधि करें. गर्म खाना खाएं. गर्मजोशी रखने वाले लोगों से मिलें.
वात की प्रकृति गतिशील होती है, इसलिए स्थिरता प्रदान करने वाली चीजों के करीब रहें. जैसे योगा, मेडिटेशन आदि.
एक्सपर्ट डॉ. रेखा कहती हैं कि वात माइंड होना कोई बुरी बात नहीं है. क्योंकि ऐसे लोग अपने आसपास का माहौल ऊर्जावान रखते हैं. इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.
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