धीरेंद्र शुक्ला/चित्रकूट. चित्रकूट में बेधक के हनुमान जी की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है क्योंकि बेधक के हनुमान की जो मूर्ति बहुत ही खूबसूरत है और नृत्य करते हुए आपको दिखाई देंगी. इस मूरत को देखने के लिए न जाने कितने लोग इस जंगल में दिन भर की यात्रा में पहुंचते हैं. लेकिन यह जंगल इतना खतरनाक बताया जाता है कि यहां पर पहुंचने के लिए ना ही कोई रास्ता रहता है और ना ही कोई सुविधा है. ऐसे में लोग पैदल यात्रा करके या फिर पहाड़ों के रास्ते से गुजर कर पहुंच ही जाते हैं.ददुआ से जुड़ा है इश मंदिर का इतिहासचित्रकूट के वरिष्ठ पत्रकार मुबीन सिद्दकी बताते हैं कि इस मूर्ति की स्थापना डकैत ददुआ ने ही जंगल में की थी. बेधक के हनुमान डकैत ददुआ की पूरी हिफाजत किया करते थे. इसलिए लोग बेधक के हनुमान के स्थान को खास समझते हैं. जिस स्थान पर हनुमान जी का मंदिर है उसी स्थान पर डकैत ददुआ को एसटीएफ और पुलिस के जवानों ने कई बार घेर लिया कई घंटे तक मुठभेड़ चली. लेकिन डकैत ददुआ को एक भी खरोंच नहीं आई थी. लोग कहते हैं कि हनुमान जी डकैत ददुआ की पूरी तरह से हिफाजत करते थे. डकैत ददुआ हनुमान का सबसे बड़ा पुजारी था और हमेशा पूजा पाठ करता था.बेधक के हनुमान में लोगों की मन्नत होती है पूरीभक्त सुखराम व सूरज ने बताया कि यह जो स्थान है और जो ये मूरत है. शायद कहीं और आपको देखने के लिए मिलेगी. बेधक के हनुमान जी सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. यहां पर भक्त बाबा के धाम में अक्सर पूजा-अर्चना करते हैं और भंडारा भी करते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर पहुंचने के लिए बहुत दुर्लभ रास्तों से गुजरना पड़ता है. बाबा के भक्तों का कहना है कि यहां अगर रास्ते का निर्माण हो जाए तो आने-जाने में सुविधा हो जाए..FIRST PUBLISHED : August 15, 2023, 17:04 IST
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