Uttar Pradesh

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का परिवार मूलभूत सुविधाओं से हैं वंचित,पत्नी घर-घर जाकर काम करने पर मजबूर



पीयूष शर्मा/मुरादाबाद. जिन लोगों ने देश को आजादी दिलाने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, खुद के भविष्य की चिंता किए बगैर देश का वर्तमान बनाने के लिए हर तरह की कुर्बानी दी. इसी तरह के एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नातिक हुसैन के परिवार का भी अब एक तरह की मुसीबतों से सामना हो रहा है. नातिक हुसैन के दोनों बेटे, नासिर हुसैन और नादिर हुसैन भी अब हमारे बीच नहीं हैं.

दोनों भाइयों की छोटी बहन राशिदा परवीन के पति शाकिर हुसैन भी 11 साल पहले गुजर गए. पति के गुजरने के बाद राशिदा की मुसीबतें और बढ़ गईं. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की बेटी राशिदा परवीन ने बताया कि मेरे पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. 1942 में उन्होंने पानो के दरीबा पर अंग्रेजों के पत्थर मार दिया था. अंग्रेजों ने उनके हाथ पर डंडा मारकर उनके हाथ की हड्डी तोड़ दी थी और फिर वह जेल में भी रहे. उन्होंने आजादी दिलाने के लिए बहुत साहसी कार्य किए जो कभी भुलाए नहीं जा सकते. लेकिन अब उनके बच्चे सरकार की मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं.

मूलभूत सुविधाएं दी जाएराशिदा परवीन ने बताया कि हमने कई बार सरकार की ओर से मकान के आवंटन की मांग की है, लेकिन अभी तक हमें मकान नहीं मिला है. हम किराए के मकान में रह रहे हैं. इसके साथ ही, हमारे बच्चे भी इधर-उधर काम करके अपना पालन-पोषण कर रहे हैं. मैं घर के काम करती हूं और वहां से पैसा कमा कर अपने बच्चे का पालन कर रही हूं. मैं सरकार से गुजारिश करती हूं कि मुझे सरकार की मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं, जैसे कि रहने के लिए छत दी जाए और मैं अपनी बेटी की शादी करना चाहती हूं, उसके लिए जितना हो सके उसकी मदद की जाए.

अंग्रेजों ने दी थी छह महीने की कड़ी सजास्वतंत्रता संग्राम सेनानी नातिक हुसैन मून वॉच कंपनी किसरौल के पास के रहने वाले थे. उन्होंने आजादी की जंग में भाग लिया और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया. व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के दौरान, 1942 में, अंग्रेज शासन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उन्हें छह महीने की कड़ी सजा सुनाई गई, जिसके बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया.
.Tags: Latest hindi news, Local18, Moradabad News, Uttarpradesh newsFIRST PUBLISHED : August 09, 2023, 15:28 IST



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