Uttar Pradesh

Sawan Special: सूर्य पुत्र ने की थी धर्मेश्वर महादेव की स्थापना, शिव ने खुश होकर सौंपा था काल का भार



अभिषेक जायसवाल/वाराणसी: काशी (Kashi) एक ऐसा शहर है जहां बाबा विश्वनाथ (Baba Vishwanath) विराजमान है. कहा जाता है इस काशी के कण कण में शंकर बसे हैं. इसी काशी में काल के देवता यमराज ने कड़ी तपस्या कर शिवलिंग की स्थापना की थी. यम के इस महादेव को धर्मेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. काशी विशेश्वर खण्ड में धर्मेश्वर महादेव का अति प्राचीन मंदिर है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां किए गए जप और तप का हजार गुना फल मिलता है.

मन्दिर से जुड़ी धार्मिक कथा है कि सूर्य पुत्र यम ने शिवलिंग की स्थापना कर यहां सैकड़ों साल तक तपस्या की थी. उनके तपस्या से भगवान भोले प्रसन्न हुए थे और फिर उन्होंने यमराज को जीवन मृत्यु के काल के लेखा-जोखा की जिम्मेदारी यमराज को सौंप दिया और उनका नामकरण भी किया.

1000 गायत्री जप का मिलता है फलमंदिर के महंत उमाशंकर उपाध्यय ने बताया कि यहां दर्शन पूजन और बाबा का जलाभिषेक से अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है. इसके अलावा दर्शन मात्र से 1000 गायत्री जप का फल भी मिलता है. यही वजह है कि काशी के तंग गलियों में मीर घातक के करीब स्थित इस प्राचीन मंदिर में दूर-दराज से भक्तजन दर्शन करने आते हैं.

चार चौकड़ी यमराज ने किया था तपइस स्थान पर यमराज ने चार चौकड़ी तक भगवान शिव का तप किया था. चार चौकड़ी यानी चार युगों के कठिन तप के बाद भगवान भोले उनसे प्रसन्न हुए थे और उनसे वरदान मांगने को कहा था. जिसपर यमराज ने उनसे जिम्मेदारी मांगी तो महाकाल भोले ने उन्हें काल की ही जिम्मेदारी सौंप दी.

कई छोटेृ-बड़े देव विग्रह विराजमानइस मंदिर में धर्मेश्वर महादेव के अलावा और भी कई छोटे बड़े देव विग्रह हैं. जिसमें कई शिवलिंग, गणेश और अन्य देवता विराजमान हैं. आज भी इस मंदिर में लोग जप और तप के लिए नियमित रूप से आते हैं.
.Tags: Local18, Uttar pradesh news, Varanasi newsFIRST PUBLISHED : July 25, 2023, 12:18 IST



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