सनन्दन उपाध्याय/बलिया: नगर पंचायत चितबड़ा गांव में स्थित ऐतिहासिक एवं प्रसिद्धि दीनदयाल भगत बरई पोखरा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है. इस पोखरे में अनगिनत मछलियां हैं. आपको बता दें कि इस पोखरे का पानी अब तक कभी सुखा नहीं और न ही इस पोखरे में मछलियों को किसी ने मारा. वर्तमान में इस पोखरे के विकास लेकर जिला प्रशासन भी पूरी तरह से प्रयासरत है.इस पोखरे को अंग्रेजों के कार्यप्रणाली से भी जोड़ा जाता है. पोखरे की कई ऐतिहासिक महत्व भी बताए जाते हैं. यह जनपद का सबसे महत्वपूर्ण पोखरा है. इसके बगल में एक बड़ा शिव मंदिर भी है. जिसका निर्माण दीनदयाल भगत ने कराया था. जहां हर समय दर्शकों की भीड़ उमड़ी रहती है. निर्माणकर्ता दीनदयाल भगत के पोता जेपी चौरसिया का कहना है कि- यह प्राकृतिक धरोहर है. यहां पर कोई भी मछली नहीं मारता. दीनदयाल भगत शिव के अपार भक्त थे. इस पोखरे का पुरा प्लांट 12 बीघे का है. आज यहां बड़े जिला स्तर पर लोग आते हैं.लोगों की लगती है भीड़यह एक प्राकृतिक धरोहर है. 10 बजे से 3:00 बजे तक यहां के सौंदर्यता को देखने के लिए लोगों की भीड़ लगती है. इसमें पानी के स्रोत इनर अंडर ग्राउंड से हैं और इसके अंदर बड़े-बड़े सुरंग है. यह पोखरा 100 वर्ष से अधिक पुराना है. जिस प्रकार से रोवे के बाल को गिना नहीं जा सकता उसी प्रकार से इन मछलियों को गिना नहीं जा सकता. यहां अनगिनत मछलियां हैं..FIRST PUBLISHED : July 03, 2023, 18:10 IST
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