सृजित अवस्थी/पीलीभीत. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में उड़ीसा स्थित पुरी की तर्ज पर जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन किया गया. आचार्य विष्णु शंखधार के मुताबिक यह रथ यात्रा रूहेलखंड मण्डल की सबसे पुरानी परम्परागत जगन्नाथ रथ यात्रा है. इसका इतिहास 350 वर्षों से भी अधिक पुराना है.हम सबने उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी मंदिर की रथ यात्रा की तस्वीरें जरूर देखी होंगी. ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर शहर वासियों को दर्शन देते हैं. ठीक इसी तर्ज पर पीलीभीत में भी सैकड़ों सालों से रथ यात्रा निकाली जाती है.शहरवासी भगवान जगन्नाथ के करेंगे दर्शनपीलीभीत शहर के चरक कुआं स्थित जगन्नाथ मन्दिर के पुजारी आचार्य विष्णु शंखधार के मुताबिक उनके पूर्वज पण्डित जयनारायण को कोई पुत्र नहीं था. जिसके लिए उन्होंने उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी मन्दिर में जा कर पूजा अर्चना की थी. जिसके बाद उन्होंने वहां से लाई अष्टधातु की मूर्ति की स्थापना शहर के चरक कुआं पर की. जिसके बाद यहां भी तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के बरेली जिले से अनुमति लेने के बाद पुरी की ही तरह रथ यात्रा निकाल कर शहरवासियों को भगवान जगन्नाथ के दर्शन कराए जाते थे.धीरे-धीरे लोगों की आस्था गहराती गई और यह एक परंपरा बन गई. तब से आज तक इस परम्परागत रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है.पीलीभीत जिले के गजेटियर में दी गई जानकारी के अनुसार इस साल इस यात्रा को 362वा वर्ष पूरा हो जाएगा.शहर के अलग अलग स्थानों पर होती है पूजाइस रथ यात्रा के दौरान शहर के तमाम प्राचीन मंदिरों के पुजारी भी रथ पर सवार भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना करते हैं. इस यात्रा का रूट तकरीबन 10 किलोमीटर लंबा होता है..FIRST PUBLISHED : June 20, 2023, 23:15 IST
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Family dinners may reduce teenage alcohol, drug and vaping use, study finds
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