अंजली शर्मा/कन्नौज. यूपी के कन्नौज के खस के इत्र के बारे में सभी जानते हैं. वहीं, खस का जो वेस्ट निकलता है. वह भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है. खस के उस वेस्ट से ऐसे पर्दे तैयार किए जाते हैं जो कि भीषण गर्मी के मौसम में पानी का थोड़ा सा छिड़काव कर करने से घर में लगाने पर ठंडक मिलती है.खस एक तरह की घास होती है, जोकि तराई वाले क्षेत्रों से आती है. जबकि सबसे महत्वपूर्ण जिला लखीमपुर है. इत्र व्यापारी खस को खरीदते हैं और जब उसका इत्र निकल जाता है. वहीं, उसके वेस्ट को अलग कर देते हैं, जिसे गिहार समाज के लोग लकड़ी लगाकर बड़े बड़े पर्दे बनाते हैं. इन पर्दों को घरों के बाहर ढाबे और होटलों में उस जगह लगाया जाता है, जहां से धूप आती हो. इसके बाद इन पर्दों को पानी से भिगो दिया जाता है. जब गर्म हवा का झोंका चलता है, तब इन पर्दों के माध्यम से ठंडी हवा और इत्र की खुशबू निकलती है.कितनी लगती है लागतखस के वेस्ट का एक पर्दा बनाने में करीब 3 से 4 घंटे का वक्त लगता है. सबसे पहले घास को छांटा बीना जाता है और उससे गांठे अलग की जाती हैं. एक पर्दे को बनाने में करीब 300 रुपये से लेकर 400 रुपये तक की लागत लग जाती है. इसके अलावा लकड़ी धागे सहित कई चीजों का इस्तेमाल होता है.ठंडी हवा देने का काम करता हैकारीगर शिव और रमेश ने बताया कि कन्नौज जिले में गिहार समाज के लोग बड़े पैमाने पर इसका काम करते हैं. कम पैसों में गरीबों को यह आसानी से मिल जाता है. साथ ही जो लोग एसी की ठंडी हवा नहीं खा पाते, वह अपने घरों में और खिड़कियों में इनके पर्दों का इस्तेमाल कर लेते हैं. जब तेज हवा और लू के थपेड़े चलते हैं, तो ये पर्दे ठंडी हवा देने का काम करता है. यह कम पैसों में मिल जाता है और लोगों को ठंडी हवा के साथ-साथ इत्र की खुशबू का भी एहसास दिलाता है.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|FIRST PUBLISHED : May 12, 2023, 12:00 IST
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