आदित्य कृष्ण / अमेठी. सरकार भले ही जल संरक्षण को लेकर काफी सक्रिय हो और जल संरक्षण को बढ़ावा देने की बात कह रही हो, लेकिन अमेठी में जल संरक्षण को लेकर जमीनी हकीकत डरावनी है. हालात इतने बदतर हैं की जगह-जगह जल दोहन तो हो ही रहा है साथ ही, जल संरक्षण को लेकर जिम्मेदार भी चुप्पी साधे बैठे हैं. हैरान करने वाली बात तो यह है कि 15 सालों से जल को लेकर मुहिम छेड़ने वाली एक प्रमुख संस्था को अफसरों से केवल निराशा हाथ लग रही है.अमेठी जनपद में जल संरक्षण को लेकर की जा रही कवायद सिर्फ कागजी या खोखली कही जा सकती है. जल संरक्षण के लिए शहर में सालों से काम कर रहे डॉ. अर्जुन पांडेय ने जल संरक्षण का मुद्दा उठाया है पर उनका दुखड़ा यह है कि कोई सुनने वाला नहीं. अमेठी में जगह-जगह तालाब और करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए अमृत सरोवर सूखे पड़े हैं. साथ ही नगर निगम पालिका क्षेत्र हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र, हर जगह पानी का दोहन, दुरुपयोग और बर्बादी धड़ल्ले से जारी है.
अमेठी के रहने वाले डॉ. पांडेय 2009 से जल बिरादरी नाम की संस्था चला रहे हैं. उन्होंने इस मिशन में 50 लड़कियों समेत 250 युवाओं को अपने साथ जोड़ा है. पांडेय बताते हैं कि अब तक डीएम के साथ उन्होंने कमिश्नर, जल संरक्षण विभाग, खुद मुख्यमंत्री और PM को पत्र लिखकर शिकायतें दर्ज कराई हैं. लगातार साक्षरता अभियान, जागरूकता कार्यक्रम के साथ ही कई बार जल संरक्षण गोष्ठी भी कर चुके हैं. फिर भी हालात सुधर नहीं पा रहे!न्यूज़ 18 लोकल से बातचीत में पांडेय ने कहा ‘सब तालाब सूखे पड़े हैं, नदियों की हालत बहुत खराब है. वहां चारों तरफ गंदगी का अंबार है. इसके साथ ही लगातार जल दोहन हो रहा है. मेरी मांग है कि नदियों को एक नाम दिया जाए. इसके साथ ही जलकुंड बनाएं जाएं.’ उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को लेकर सबको इस मुहिम में साथ देना होगा. पानी की समस्या हल करना एक अकेले के बस की बात नहीं है.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|FIRST PUBLISHED : May 02, 2023, 16:17 IST
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