गौशाला से निकलने वाले गोबर से अब देसी खाद ही नहीं बल्कि उपयोगी गौकाष्ठ भी बनाई जा रही है. गौकाष्ठ बनाने वाली मशीन के द्वारा प्रतिदिन 8 घंटे काम करके करीब 10 क्विंटल गौकाष्ठ तैयार की जा सकती है.शमशान में जलने वाली चिताओं में लकड़ी की जगह गौकाष्ठ का उपयोग होगा.लकड़ी के मुकाबले गौकाष्ठ से 8 से 10 प्रतिशत कम कार्बन का उत्सर्जन होता है .
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