आगरा. आजकल आगरा नगर निगम ने गंदे नालों की बदबू से निजात दिलाने के लिए एक खास तकनीकी का इस्तेमाल करना शुरू किया है. बता दें कि आगरा में 90 से ज्यादा नाले हैं, जो सीधे यमुना में गिरते हैं. इसकी वजह से यमुना मैली होती है. खासकर आगरा किले के बगल में शहर का बड़ा नाला बहता है. ये सीधे तौर पर यमुना में गिरता है और उसकी दुर्गंध यहां से गुजरने वाले पर्यटकों को परेशान करती है. अब इस दुर्गंध से निजात दिलाने के लिए आगरा नगर निगम खास तकनीकी का इस्तेमाल कर रहा है. इस तकनीकी का नाम है बायो एर्नाकुलम.पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि यह तकनीकी बायो एर्नाकुलम है. इसमें खास तरीके के बैक्टीरिया होते हैं, जो गंदगी और बदबू को खा जाते हैं. इससे नालों से दुर्गंध नहीं आती है. आगरा लाल किले के बगल में बहने वाले नाले पर एक जगह बड़ी टंकी बनाकर ड्रिप की सहायता से बूंद बूंद करके बैक्टीरिया यमुना के गंदे पानी में मिलाए जा रहे हैं, ताकि जी20 समिट के तहत प्रतिनिधि जब आगरा लाल किला घूमने आएंगे तो उनको इस नाले से दुर्गंध ना आए. वर्तमान में आगरा के 69 नालों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.रेलवे के कोच में भी इसी तकनीक का होता है इस्तेमालपंकज भूषण ने बताया कि इसी तकनीकी का इस्तेमाल रेलवे अपने बायो टॉयलेट के में करती है. इस बैक्टीरिया को बायोडायजेस्टर नाम से जाना जाता है. टॉयलेट के डाइजेस्टर कंटेनर में इस बैक्टीरिया को डाला जाता है. जो मानव मल को खाकर उसे पानी और मेथेन गैस में बदल देता है, जिससे कोई गंदगी नहीं होती. ये बैक्टीरिया रेलवे के लिये क्रांतिकारी साबित हुआ है. सफाई पर होने वाला खर्च भी इस बैक्टीरिया की वजह से बेहद कम हो गया है. वहीं, स्टेशन और रेल की पटरियों पर अब गंदगी नहीं होती है.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|FIRST PUBLISHED : January 30, 2023, 15:32 IST
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