Uttar Pradesh

World Mental Health Day 2022: कैसे रुक सकते हैं सुसाइड केस? जानिए मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से



रिपोर्ट: शाश्वत सिंह
झांसी. हर साल 10 अक्टूबर 2022 को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है. आज के समय में मेंटल हेल्थ एक ऐसा विषय है जिस पर चर्चा करना बहुत जरूरी हो गया है. शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही लोगों की मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति भी बिगड़ती जा रही है. इस वजह से आत्महत्या के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं.
झांसी में भी पिछले एक महीने में आत्महत्या के 8 मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही चार ऐसे भी मामले आए जिनमें आत्महत्या की कोशिश की गई. लेकिन वह असफल रही. लगातार बढ़ते ऐसे मामलों को किस प्रकार रोका जा सकता है, यह जानने के लिए न्यूज़ 18 लोकल ने बात की मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. मनीष मिश्रा से. आइए जानें मुख्‍य अंश.
पिछले 1 महीने में सुसाइड के प्रमुख कारणझांसी में पिछले 1 महीने में जितने भी आत्महत्या के मामले सामने आए हैं. वह सभी युवाओं से जुड़े हुए हैं. उनकी हिस्ट्री की जांच करने के बाद यह बात सामने आई कि यह सभी युवा सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल करते थे. असल दुनिया से ज्यादा सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते थे. वहीं अपनी एक अलग दुनिया बसा रखी थी. दोस्तों या परिवार से बात करने की वजह सोशल मीडिया पर बने दोस्तों से बात करने में ज्यादा रुचि रखते थे. अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए भी वह सोशल मीडिया का ही सहारा लेते थे.
परिवार और दोस्तों के बजाय सोशल मीडिया पर रहते है सक्रियमनोविज्ञान कहता है कि बच्चे जो देखते हैं. उसी का अनुसरण करते हैं. आज के समय में मां-बाप भी सोशल मीडिया पर अधिक समय देते हैं. बच्चों को समय देने से ज्यादा वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को समय देते हैं. यहां तक की जन्मदिन की बधाई भी सोशल मीडिया के माध्यम से देते हैं. जब बच्चा उन्हें ऐसा करते हुए देखता है तो उसे लगता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कोई अच्छी जगह ही होगी. इस समस्या को दूर करने का तरीका यही है कि पेरेंट्स अपने बच्चों से बात करें. उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करें और यथासंभव समाधान भी बताएं.
इस समस्या में जनरेशन गैप का भी रोलआज के समय में बच्चे अपना स्पेस चाहते हैं. माता-पिता को भी यह बात समझनी चाहिए और बच्चों को उचित स्पेस देना चाहिए. माता-पिता को ऐसा माहौल बनाना चाहिए. जिससे बच्चे उनसे डरे नहीं और खुल कर बात कर सकें. बच्चों को एक ऐसा माहौल दीजिए जिससे उनकी झिझक दूर हो सके. इसके साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि हर उम्र और समय की अलग परेशानियां होती हैं. बच्चों की समस्याओं को समझकर अगर उनके हिसाब से समाधान देंगे तो जनरेशन गैप जैसी समस्या नहीं आएगी.
समाज को मेंटल हेल्थ की समस्या को कैसे देखना चाहिए?हमें यह समझना होगा कि जिस प्रकार शरीर का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है. ठीक उसी तरह मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है. इसका इलाज भी मुमकिन है. लोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए धार्मिक स्थलों पर जाने लगते हैं, लेकिन उन्हें मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट के पास जाना चाहिए. लोगों को यह समझना होगा कि धार्मिक स्थल आस्था के लिए हैं और इलाज के लिए डॉक्टर और अस्पताल हैं.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|Tags: Jhansi news, Mental health, World mental health dayFIRST PUBLISHED : October 10, 2022, 16:26 IST



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