अभिषेक जायसवाल/वाराणसी. देशभर में दुर्गा पूजा (Durga Puja) उत्सव की धूम है. बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी (Kashi) में भी इन दिनों मिनी बंगाल की झलक देखने को मिल रही है. काशी में दुर्गा पूजा उत्सव का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है और इससे जुड़े कई दिलचस्प किस्से भी हैं.ऐसी ही दिलचस्प कहानी है वाराणसी (Varanasi) के पुराना दुर्गाबाड़ी की. देवी के इस शक्ति पीठ पर 255 साल पहले यानी 1767 में मुखर्जी परिवार ने दुर्गापूजा की शुरुआत की थी.शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratra) के षष्टी तिथि को मुखर्जी परिवार ने अपने घर में प्रतिमा की स्थापना की थी.तीन दिनों तक मुखर्जी परिवार ने पूरे वैदिक रीति रिवाज से देवी की पूजा की. लेकिन दशहरा के दिन कुछ ऐसा हुआ कि हर कोई हैरान रह गया. 4 फीट के इस माटी और पुआल की प्रतिमा को सैकड़ों लोग मिलकर भी नहीं उठा सकें. अगले दिन भी लोगों ने प्रयास किया लेकिन देवी की प्रतिमा नहीं हिली.365 दिन होती है पूजामुखर्जी परिवार से जुड़ी मधुचन्दा बनर्जी ने बताया कि उसके बाद देवी ने घर के मुखिया को स्वप्न में कहा कि वो उनकी पूजा से बेहद प्रसन्न हैं और काशी में ही रहना चाहती हैं. सिर्फ गुड चना से उनकी पूजा करने से वो खुश रहेंगी बस तब से देवी की प्रतिमा यहां स्थापित है और मुखर्जी परिवार 365 दिन यहां पूजा अर्चना करता है.नवरात्र में दर्शन के लिए आते हैं भक्तदेवी के इस चमत्कार के बारे में जो भी सुनता है वो जरूर यहां आकर देवी का दर्शन करता है. नवरात्रि में बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए आते है.भक्तों का भी ऐसा मानना है कि यहां नियमित पूजन से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|FIRST PUBLISHED : October 02, 2022, 19:31 IST
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