हरीकांत शर्मा
आगरा. आगरा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव बरारा में 11 साल के देवांश धनगर कंप्यूटर के मास्टर हो गए हैं. कंप्यूटर के जानकारों की मानें तो कंप्यूटर की प्रोग्राम कोडिंग इतनी टफ मानी जाती है, लेकिन 11 साल के देवांश धनगर इतनी छोटी सी उम्र में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और कोडिंग में महारत हासिल कर चुके हैं. सबसे ज्यादा चौंका देने वाली बात ये है कि देवांश 8वीं क्लास तक कभी स्कूल गए नहीं. उन्होंने केवल घर पर रहकर पढ़ाई की थी. अपने पिता लाखन सिंह धनगर और इंटरनेट के माध्यम से उन्होंने कोडिंग सीखी और अब बच्चों को यूट्यूब पर खुद कोडिंग सिखाते हैं.
देवांश महज 11 साल के हैं इस उम्र के बच्चे अपना ज्यादातर वक्त खेलने में बिताते हैं, लेकिन देवांश लैपटॉप और कीबोर्ड पर घंटों समय खर्च करते हैं. देवांश ने अब तक 50 से ज्यादा अलग अलग तरह के Game और App बना दिए हैं. जब विश्व की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नासा की नजर आगरा के छोटे से गांव में रहने वाले देवांश पर पड़ी तो उन्होंने हाथों हाथ 2026 में लांच होने वाले मार्स मिशन की प्रोग्रामिंग कोडिंग की टीम के लिये देवांश धनगर को सिलेक्ट कर लिया.
8वीं तक नहीं गए कभी स्कूल, सीधे 9th में मिला एडमिशन
बता दें कि देवांश धनगर के पिता बेहद साधारण परिवार से हैं. उन्होंने आरबीएस कॉलेज से एमसीए किया है. मां जया धनगर हिंदी से MA हैं. वे बच्चों को घर पर ही ट्यूशन देती हैं. देवांश धनगर 8वीं क्लास तक कभी स्कूल नहीं गए. उन्होंने घर पर ही रह कर अपने पिता से बेसिक एजुकेशन ली है. उनके पिता घर पर ही एजुकेशन टूर नाम से एक छोटी सी एकेडमी चलाते हैं. देवांश ने हाई स्कूल 80 प्रतिशत अंकों के साथ पास किया है. फिलहाल वह 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं. गांव में ही देवांश के पिता छोटे बच्चों को कोडिंग और बेसिक एजुकेशन की शिक्षा देते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को फ्री में बेसिक एजुकेशन के साथ-साथ वोटिंग और प्रोग्रामिंग सिखाते हैं. उनके अकेडमी में लगभग 70 से ज्यादा स्टूडेंट कोडिंग लैंग्वेज, प्रोग्रामिंग सीख रहे हैं.
कंप्यूटर से भी तेज है देवांश का दिमाग
देवास धनगर की प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वह गणित की कठिन से कठिन कैलकुलेशन को चुटकियों में हल कर देता है. अगर आप देवांश से कई अंकों की संख्या को मल्टीप्लाई, जोड़ने,घटाने के लिये कहेंगे तो इसका जवाब वह पल भर में बिना किसी केलकुलेटर की मद्दत से फट से दे देगा. इस बात से पता चलता है कि उसका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज है. बचपन से ही देवांश को कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी से जुड़ी चीजों से बेहद लगाव है.
उनके पिता बताते हैं कि बचपन में जब वे कंप्यूटर पर काम करते थे, तो देवांश बहुत बारीकी से इन चीजों को समझते थे. यही कारण है कि उन्हें बचपन से ही कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर में लगाव होता चला गया. अब कंप्यूटर प्रोग्राम और कोडिंग लैंग्वेज में करियर बनाने का फैसला लिया है.
डेढ़ सौ से ज्यादा मिल चुके हैं अवार्ड
देवांश धनगर को कोडिंग और प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के लिए सबसे कम उम्र के लिए कई सारे अवार्ड मिल चुके हैं. इसके साथ ही आधा दर्जन से ज्यादा मैगजीन में उनकी स्टोरी जा चुकी है. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें बाल गौरव का अवार्ड दिया है. इसके साथ ही उन्होंने हॉवर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया है. पूरे विश्व से 50 प्रतिभाशाली बच्चे चुने गए थे, जिसमें देवांश भी शामिल है.
बड़े होकर गरीब बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में करेंगे काम
देवांश धनगर की प्रसिद्धि आसपास के इलाकों में खूब है. देवांश को देखते-देखते अब आसपास के गांव के बच्चे भी कंप्यूटर प्रोग्रामिंग एंड लैंग्वेज और कोडिंग में अपना इंटरेस्ट दिखा रहे हैं. देवांश कहते हैं कि उनका Amity University noida जाने का सपना है. बड़े होकर शिक्षा के क्षेत्र में वह काम करना चाहते हैं. वह ऐसे गरीब बच्चों के लिए कई सारे ऐप बनाएंगे जो फ्री में एजुकेशन ले सकें.
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