ग्लूटेन एक तरह का प्रोटीन होता है जो गेहूं, जौ, राई जैसे अनाजों में पाया जाता है. यह पास्ता, अनाज और बीयर सहित कई आम खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों हो सकता है. इतना ही नहीं ग्लूटेन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट और यहां तक कि कुछ दवाओं में भी होता है.
कई लोगों को ग्लूटेन सूट नहीं करता है. यह एक गैर-सीलिएक बीमारी है, जिसे ग्लूटेन इंटॉलरेंस कहते हैं. रिसर्च गेट में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग 8.4% लोग ग्लूटेन इंटॉलरेंट हैं. इनमें कुछ लोगों को सीलिएक डिजीज है. भारत में 5-6% लोगों को गेहूं या ग्लूटेन से समस्या होती है, जिसमें 90% लोगों को यह पता ही नहीं है. इस लेख की मदद से आप यह जान सकते हैं कहीं आप भी तो इससे ग्रसित नहीं है.
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क्यों होती है ग्लूटेन इंटॉलरेंस की समस्या
ग्लूटेन इंटॉलरेंस एक ऐसी कंडीशन है जिसमें शरीर ग्लूटेन को निगेटिव रिस्पॉन्स देता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गेहूं से एलर्जी है. हालांकि इसके होने का अभी कोई सटीक कारण पूरी तरह से नहीं पता है. लेकिन माना जाता है कि इसमें जेनेटिक, गट हेल्थ और इम्यून सिस्टम सहित कई कारक शामिल होते हैं. महिलाओं में यह समस्या ज्यादा कॉमन होती है.
ग्लूटेन इंटॉलरेंस के लक्षण
पेट दर्दएनीमियाएंग्जायटीपेट फूलना या गैसअवसाददस्त या कब्जथकानसिरदर्दजोड़ों का दर्दमतली और उल्टीत्वचा पर चकत्तेइरिटेबल बाउल सिंड्रोम
क्या है इलाज
ग्लूटेन इंटॉलरेंस का कोई इलाज नहीं है. लेकिन ज्यादातर लोग ग्लूटेन फ्री डाइट से इसके लक्षणों से राहत पा लेते हैं. लेकिन इस कंडीशन को मैनेज करने के लिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है. क्योंकि शोध से पता चलता है कि ग्लूटेन फ्री डाइट से आपको हाइपरग्लाइसेमिया या टाइप 2 मधुमेह और पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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