गोंडा. जिले के जिला मुख्यालय से लगभग 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पृथ्वी नाथ महादेव मंदिर, माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 5000 वर्ष पुराना है. यह भी मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को, चाहे उनकी ऊंचाई छोटी हो या बड़ी, जल चढ़ाने के समय एड़ी उठाकर जल चढ़ाना पड़ता है. जो कोई श्रद्धालु एड़ी उठाकर जल नहीं चढ़ाता, भगवान भोलेनाथ उसका जल स्वीकार नहीं करते. यह परंपरा विगत हजारों वर्षों से चली आ रही है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के पुजारी हनुमंत शरण तिवारी ने बताया कि गोंडा जिले में पृथ्वी नाथ मंदिर का इतिहास अत्यंत रोचक है.
पुरातत्व विभाग की जांच में इस मंदिर के शिवलिंग को लगभग 6000 साल पुराना माना गया है. इतना ही नहीं, इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास द्वापर युग से जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि द्वापर युग में पांडवों के अज्ञातवास के दौरान इस मंदिर की स्थापना की गई थी. पुजारी के अनुसार, यहां दर्शन और पूजन करने से सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि इस मंदिर का निर्माण भीम ने कराया था, गोंडा और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में भक्त भगवान शंकर का आशीर्वाद लेने के लिए इस मंदिर में आते हैं. महाशिवरात्रि और सावन माह में यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं.
जलाभिषेक का विशेष महत्व
हनुमंत शरण तिवारी ने बताया कि यहां पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है, यहां स्थापित शिवलिंग की ऊंचाई इतनी है कि एड़ी उठाकर ही जलाभिषेक किया जा सकता है. सावन मास को भगवान भोलेनाथ का महीना माना गया है, इसलिए इस माह में पड़ने वाले सोमवार और शुक्रवार को भगवान शिव का पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
पृथ्वी नाथ मंदिर का पौराणिक महत्व
हनुमंत शरण तिवारी ने बताया कि 5 पांडव मां कुंती के साथ अज्ञातवास के दौरान यहीं आए और अपना जीवन यापन करने लगे. इसी स्थान पर बकासुर नामक राक्षस का वध भीम ने किया था. बकासुर राक्षस का वध करने के बाद भीम को ब्रह्महत्या का पाप लगा, ब्रह्महत्या से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्री कृष्ण के आदेशानुसार, लगभग साढ़े छह सौ वर्ष पूर्व द्वापर युग में भीम ने इस शिवलिंग की स्थापना की. उस समय इस मंदिर का नाम भीमेश्वर महादेव था। बाद में इसे पृथ्वी नाथ मंदिर कहा जाने लगा.
कब-कब लगता है मेला
हनुमंत शरण तिवारी बताते हैं कि पृथ्वी नाथ मंदिर पर प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार, इसके अलावा शिवरात्रि, कजरी तीज और सावन में विशेष मेले का आयोजन किया जाता है. इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जिला और आसपास के क्षेत्रों से यहां आते हैं. हनुमंत शरण तिवारी बताते हैं कि पृथ्वी नाथ मंदिर पर पूरे भारतवर्ष से श्रद्धालु आते हैं, इसके अलावा नेपाल, इटली और जापान से भी श्रद्धालु जलाभिषेक करने के लिए यहां आते हैं.

